लल्लनगुरु न्यूज़ की खबर का असर! SDM रोहित सिंह ने लिया गंभीरता से, पाली में जमीन के रकबे की जांच तेज, जल्द कसेगा शिकंजा; बेनकाब हो सकते हैं कई बड़े चेहरे!

कोरबा। जिले के पाली राजस्व अनुविभाग अंतर्गत नगर के शिव मंदिर के समीप स्थित बेशकीमती जमीन के रकबे में कथित अंतर का मामला अब जांच के दायरे में आ गया है। नेशनल हाईवे से लगी इस जमीन के पुराने राजस्व रिकॉर्ड और वर्तमान ऑनलाइन अभिलेखों में दर्ज रकबे के बीच अंतर सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है। लल्लनगुरु न्यूज़ द्वारा इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद राजस्व विभाग की जांच तेज होने की जानकारी सामने आ रही है। पाली एसडीएम रोहित कुमार सिंह के स्तर पर मामले की जांच-पड़ताल किए जाने की बात कही जा रही है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में पुराने राजस्व अभिलेखों, वर्तमान ऑनलाइन रिकॉर्ड और जमीन की बिक्री से जुड़े दस्तावेजों के परीक्षण के बाद क्या तथ्य सामने आते हैं और जिम्मेदारों के संबंध में प्रशासन क्या कदम उठाता है।
लल्लनगुरु न्यूज़ की खबर के बाद जांच पर नजर

पाली नगर में शिव मंदिर के समीप स्थित इस जमीन को लेकर सामने आए रकबे के अंतर ने राजस्व रिकॉर्ड की विश्वसनीयता और भूमि के वास्तविक क्षेत्रफल से जुड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले को लल्लनगुरु न्यूज़ ने प्रमुखता से उठाया, और मामले की जांच की मांग की। इसके बाद अब संबंधित राजस्व अभिलेखों की जांच किए जाने की जानकारी सामने आ रही है। स्थानीय स्तर पर इस मामले को लेकर चर्चा तेज है। हालांकि, जांच में अब तक क्या निष्कर्ष निकला है और किसी अधिकारी या व्यक्ति की जिम्मेदारी निर्धारित हुई है या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
पुराने मिसल रिकॉर्ड में 38 डिसमिल, ऑनलाइन रिकॉर्ड में 52.40 डिसमिल!

इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू खसरा नंबर 278/3 से संबंधित भूमि के रकबे में सामने आया अंतर है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पुराने मिसल रिकॉर्ड में जमीन का रकबा 38 डिसमिल दर्ज बताया जा रहा है, जबकि वर्तमान ऑनलाइन राजस्व रिकॉर्ड में संबंधित उपखसरों का कुल रकबा 0.2120 हेक्टेयर यानी लगभग 52.40 डिसमिल दर्ज दिखाई देता है। इस प्रकार पुराने रिकॉर्ड और वर्तमान ऑनलाइन अभिलेखों के बीच करीब 14.40 डिसमिल का अंतर सामने आता है। आखिर यह अंतर किन परिस्थितियों में और किस प्रक्रिया के तहत आया? क्या इसके पीछे विधिवत भूमि विभाजन, राजस्व रिकॉर्ड में संशोधन या किसी अन्य प्रक्रिया की भूमिका है? इन सवालों का जवाब संबंधित मूल अभिलेखों, नामांतरण प्रकरणों, बंटवारा दस्तावेजों और राजस्व अधिकारियों के रिकॉर्ड की जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा।
रास्ते के नाम पर जमीन छोड़ने की बात, अतिरिक्त रकबे को लेकर भी सवाल

मामले से जुड़े स्थानीय सूत्रों के हवाले से यह दावा भी किया जा रहा है कि जमीन के एक हिस्से में रास्ते के लिए भूमि छोड़े जाने का उल्लेख है और इस आधार पर करीब 10 डिसमिल अतिरिक्त क्षेत्रफल को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि पुराने रिकॉर्ड, रास्ते के लिए छोड़ी गई भूमि और वर्तमान राजस्व अभिलेखों का मिलान किया जाता है, तो वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। हालांकि, करीब 25 डिसमिल अतिरिक्त भूमि से संबंधित चर्चा और दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। इसलिए पूरे मामले में वास्तविक रकबे का निर्धारण दस्तावेजों के सत्यापन और जरूरत पड़ने पर स्थल निरीक्षण के बाद ही किया जाना उचित होगा।
14 लोगों को प्लॉट बेचने का दावा, अब बिक्री दस्तावेजों की जांच अहम
इस जमीन को छोटे-छोटे भूखंडों में विभाजित कर करीब 14 लोगों को बेचे जाने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे में जांच केवल पुराने और नए राजस्व रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि भूमि के बंटवारे, नामांतरण, पंजीकृत विक्रय विलेखों और प्रत्येक भूखंड के वास्तविक क्षेत्रफल का भी मिलान महत्वपूर्ण होगा। यदि अभिलेखों की जांच में रकबे की अनियमितता या किसी नियम के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्तियों की भूमिका और जिम्मेदारी निर्धारित करने का आधार बन सकता है। हालांकि, फिलहाल किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा, क्योंकि मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएगा।
अब जांच के निष्कर्ष पर टिकी निगाहें, क्या होगी कार्रवाई?
बेशकीमती जमीन से जुड़े इस मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि पुराने मिसल रिकॉर्ड और वर्तमान ऑनलाइन राजस्व अभिलेखों के बीच अंतर कैसे आया और जमीन के वास्तविक रकबे का निर्धारण किस आधार पर किया जाएगा। लल्लनगुरु न्यूज़ की खबर के बाद जांच की दिशा में सामने आ रही गतिविधियों से मामले को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं। अब देखना होगा कि राजस्व विभाग दस्तावेजों का परीक्षण कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करता है या नहीं और यदि किसी स्तर पर अनियमितता प्रमाणित होती है, तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाती है या नहीं।
फिलहाल इस मामले में जांच के अंतिम निष्कर्ष और आधिकारिक कार्रवाई का इंतजार है। पुराने रिकॉर्ड, वर्तमान ऑनलाइन प्रविष्टियों और जमीन की बिक्री से जुड़े दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने ला सकती है।









