रेंजर-तहसीलदार की कथित मिलीभगत से जंगल उजाड़ने का खेल? पसान जंगल कटाई मामले में DFO कटघोरा ने लिया संज्ञान, बोले—लापरवाही बर्दाश्त नहीं, होगी कड़ी कार्रवाई!
रेंजर को जानकारी देने के बावजूद तीन दिनों तक कार्रवाई नहीं होने पर DFO नाराज, बोले—“ये गलत है, वन अधिकारी की जिम्मेदारी बनती है।”

पसान के जंगल में 50 से अधिक सरई-साल के पेड़ों की कटाई का आरोप! रेंजर को जानकारी देने के बावजूद तीन दिनों तक कार्रवाई नहीं होने पर DFO नाराज, बोले—“ये गलत है, वन अधिकारी की जिम्मेदारी बनती है।” पोकलेन मशीनों से जमीन समतल करने और सड़क ठेकेदार के कथित कैंप को लेकर उठे गंभीर सवाल।
पसान, कोरबा। कटघोरा वनमंडल के पसान रेंज अंतर्गत पुराना बेरियल (दर्रीपारा) के पास जंगल में बेशकीमती सरई-साल के पेड़ों की कथित कटाई का मामला अब गंभीर होता जा रहा है। स्थानीय स्तर पर 50 से अधिक पेड़ों की कटाई किए जाने का आरोप लगाया जा रहा है। वहीं, पोकलेन मशीनों से जमीन समतल करने और सड़क निर्माण का ठेका लेने वाले एक ठेकेदार के कथित कैंप के लिए जमीन तैयार किए जाने की बात सामने आई है। मामले में सबसे गंभीर सवाल यह है कि जब कथित तौर पर लगातार तीन दिनों से कटाई जारी थी और संबंधित रेंजर मनीष सिंह को इसकी जानकारी भी दी गई थी, तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

रेंजर की कार्रवाई नहीं करने पर DFO ने जताई नाराजगी
मामले को लेकर डीएफओ कटघोरा ने संज्ञान लिया है। रेंजर द्वारा कार्रवाई नहीं किए जाने के संबंध में पूछे जाने पर डीएफओ ने इसे गलत बताया और कहा कि वन अधिकारी की जिम्मेदारी बनती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और मामले में कड़ी कार्रवाई की जाएगी। डीएफओ के इस रुख के बाद अब सवाल यह है कि क्या मौके पर तत्काल जांच कराई जाएगी और यदि लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय होगी?

50 से अधिक सरई-साल के पेड़ों की कटाई का आरोप, किसकी अनुमति से चली पोकलेन?
पुराना बेरियल के पास जंगल में 50 से अधिक बेशकीमती सरई-साल के पेड़ों की कटाई का दावा किया जा रहा है। साथ ही, पोकलेन मशीनों से जमीन समतल किए जाने की बात भी सामने आई है। यदि यह दावा सही है, तो यह पता लगाना जरूरी है कि कितने पेड़ काटे गए, कटाई किसने कराई और इसके लिए कोई वैधानिक अनुमति ली गई थी या नहीं। आखिर जंगल की प्राकृतिक संपदा को नुकसान पहुंचने की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी?

सड़क ठेकेदार के कथित कैंप के लिए जंगल की जमीन तैयार करने का आरोप
मामले में आरोप है कि सड़क निर्माण का ठेका लेने वाले एक ठेकेदार के कथित कैंप के लिए जमीन समतल की जा रही है। ऐसे में भूमि के स्वामित्व, उपयोग की अनुमति, पेड़ों की कटाई से संबंधित स्वीकृति और पोकलेन मशीनों से कराए जा रहे कार्य की जांच आवश्यक है। जमीन किस विभाग के अधीन है और वहां काम कराने की अनुमति किसने दी, इन सवालों का जवाब दस्तावेजों और स्थल निरीक्षण से सामने आना चाहिए।
रेंजर ने बताया राजस्व का मामला, लेकिन वन अधिकारी की जिम्मेदारी से कैसे बचेंगे?
मामले में पसान रेंजर मनीष सिंह द्वारा इसे राजस्व का मामला बताए जाने की बात सामने आई है। लेकिन जमीन के स्वामित्व का निर्धारण और पेड़ों की कटाई की वैधानिकता की जांच अलग-अलग पहलू हैं। डीएफओ द्वारा कार्रवाई नहीं किए जाने को गलत बताए जाने के बाद अब विभाग से अपेक्षा है कि वह मौके का निरीक्षण कराए, कटे हुए पेड़ों की गणना करे और यह पता लगाए कि सूचना मिलने के बाद संबंधित स्तर पर क्या कार्रवाई की गई।
तहसीलदार, रेंजर और ठेकेदार की भूमिका की जांच की मांग
मामले में तहसीलदार, रेंजर और संबंधित ठेकेदार की भूमिका को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। कथित मिलीभगत के आरोपों की पुष्टि अभी जांच से होनी बाकी है। इसलिए जरूरी है कि जांच निष्पक्ष हो और भूमि संबंधी अभिलेखों, कार्य की अनुमति, पेड़ों की कटाई तथा अधिकारियों को दी गई सूचना की पड़ताल की जाए। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब DFO के कड़े रुख पर निगाहें, क्या होगी मौके पर कार्रवाई?
डीएफओ कटघोरा ने मामले को संज्ञान में लेते हुए लापरवाही बर्दाश्त नहीं किए जाने और कड़ी कार्रवाई की बात कही है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वन विभाग कब मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का सत्यापन करता है और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं। क्या कथित कटाई पर रोक लगेगी? क्या संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच होगी? और क्या दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई होगी?
फिलहाल, पसान के पुराना बेरियल के पास 50 से अधिक सरई-साल के पेड़ों की कटाई का दावा जांच का विषय है। डीएफओ के संज्ञान और कड़े रुख के बाद अब इस मामले में केवल बयान नहीं, बल्कि मौके पर जांच, तथ्यों का सत्यापन और जवाबदेही तय करने वाली कार्रवाई का इंतजार है।









