दीपावली पर आयुष्मान कोऑर्डिनेटर का वेतन रोकने का आरोप, एम.जे.एम. हॉस्पिटल के संचालक प्रिंस जैन के खिलाफ सहायक श्रम आयुक्त से शिकायत

कोरबा। दीपावली जैसे बड़े पर्व के दौरान वेतन नहीं मिलने से परेशान एक निजी अस्पताल के कर्मचारी ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ श्रम विभाग का दरवाजा खटखटाया है। नया बस स्टैंड, टीपी नगर स्थित एम.जे.एम. हॉस्पिटल में आयुष्मान कोऑर्डिनेटर के पद पर कार्यरत विनोद कुमार महतो ने अस्पताल के संचालक एवं एमडी प्रिंस जैन पर दुर्भावनापूर्वक अक्टूबर माह का वेतन रोकने का आरोप लगाया है। इस संबंध में उन्होंने 6 नवंबर 2026 को सहायक श्रम आयुक्त, कोरबा को लिखित शिकायत सौंपकर बकाया वेतन दिलाने और नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
506 आयुष्मान केस से अस्पताल को 1.61 करोड़ रुपये दिलाने का दावा

शिकायतकर्ता विनोद कुमार महतो के अनुसार, वह 7 मार्च 2026 से एम.जे.एम. हॉस्पिटल में आयुष्मान कोऑर्डिनेटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें प्रतिमाह 23 हजार रुपये वेतन तथा 3 हजार रुपये पीएफ के रूप में अलग से जमा किए जाने की जानकारी दी गई है। उनका दावा है कि आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत अब तक 506 केस के माध्यम से अस्पताल प्रबंधन को 1 करोड़ 61 लाख 43 हजार 131 रुपये की राशि प्राप्त कराने में उनकी भूमिका रही है।
छुट्टी लेने के विवाद में पूरे महीने का वेतन रोकने का आरोप

विनोद महतो ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि दीपावली से पहले उनका अक्टूबर माह का वेतन रोक दिया गया। वेतन रोके जाने के पीछे अस्पताल संचालक द्वारा बिना उनसे पूछे छुट्टी लेने की बात कही गई। जबकि शिकायतकर्ता का दावा है कि उन्होंने अस्पताल के एडमिन अधिकारी से विधिवत छुट्टी स्वीकृत कराई थी।
उनका कहना है कि छुट्टी को लेकर हुए विवाद के कारण पूरे महीने का वेतन रोक देना अनुचित है। वेतन नहीं मिलने से दीपावली के दौरान आर्थिक संकट खड़ा हो गया और यहां तक कि राशन, मिठाई तथा कपड़े खरीदने में भी परेशानी का सामना करना पड़ा।

दो-तीन महीने से डांट-फटकार का भी लगाया आरोप
शिकायत में कर्मचारी ने यह भी उल्लेख किया है कि पिछले दो से तीन महीनों से अस्पताल संचालक द्वारा उन्हें अनावश्यक रूप से डांट-फटकार किए जाने का आरोप है। हालांकि उन्होंने अस्पताल की अनुशासन व्यवस्था समझकर इन बातों को नजरअंदाज किया। लेकिन दीपावली और धनतेरस के अवसर पर भी वेतन नहीं मिलने से वह मानसिक रूप से परेशान और अपमानित महसूस कर रहे हैं।
तनाव के बीच अस्पताल में भर्ती होने की बात
शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में दावा किया है कि लगातार चल रहे घटनाक्रम और आर्थिक परेशानी के कारण उनका स्वास्थ्य खराब हो गया है तथा वर्तमान में वह जेपी हॉस्पिटल में भर्ती हैं। उन्होंने श्रम विभाग को यह भी आशंका जताई है कि शिकायत करने के बाद अस्पताल प्रबंधन उनके विरुद्ध झूठी शिकायत करवा सकता है।
अब श्रम विभाग की कार्रवाई पर निगाहें
विनोद कुमार महतो ने सहायक श्रम आयुक्त से तत्काल उनका बकाया वेतन दिलाने, अस्पताल प्रबंधन को भविष्य में कर्मचारियों के साथ इस प्रकार का व्यवहार नहीं करने की चेतावनी देने तथा पूरे मामले में नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।
शिकायत की प्रतिलिपि कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी, कोरबा तथा पुलिस अधीक्षक, कोरबा को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी निजी अस्पताल में कर्मचारी की छुट्टी को लेकर हुए विवाद के आधार पर पूरे महीने का वेतन रोका जा सकता है? यदि कर्मचारी ने नियमानुसार छुट्टी ली थी, तो अस्पताल प्रबंधन के पास वेतन रोकने का क्या आधार है?

फिलहाल ये सभी आरोप शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए हैं। मामले में अस्पताल प्रबंधन का पक्ष और श्रम विभाग की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। अस्पताल प्रबंधन का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।









