GPM BREAKING: धनगवां पंचायत में 15वें वित्त की राशि पर बड़ा सवाल! मार्च में पैसा निकला, अक्टूबर में रंग-पोताई; सरपंच-सचिव की भूमिका पर उठी जांच की मांग!
अन्य विकास कार्यों के भुगतानों में भी गड़बड़ी की आशंका, 16 भुगतान जांच के दायरे में! कैशबुक, बिल-वाउचर और निर्माण कार्यों का भौतिक सत्यापन हुआ तो खुल सकती है पूरी कहानी!

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। ग्राम पंचायत धनगवां में 15वें वित्त आयोग की राशि के उपयोग को लेकर सवालों का घेरा गहराता नजर आ रहा है। पंचायत भवन की रंग-पोताई और मरम्मत के नाम पर भुगतान की तारीख तथा काम कराए जाने की अवधि को लेकर उठे सवालों ने पंचायत के वित्तीय लेनदेन की जांच की जरूरत बढ़ा दी है। आरोप है कि मार्च में राशि का भुगतान हो गया, जबकि संबंधित काम अक्टूबर में कराया जा रहा है। यदि भुगतान के समय कार्य पूरा नहीं हुआ था, तो आखिर किस आधार पर राशि जारी की गई? क्या काम पूरा होने का प्रमाणपत्र जारी किया गया था? क्या बिल-वाउचर और माप पुस्तिका में दर्ज विवरण वास्तविक स्थिति से मेल खाते हैं? इन सवालों का जवाब अब दस्तावेजी जांच और मौके के सत्यापन से ही सामने आएगा।


मार्च में भुगतान, अक्टूबर में रंग-पोताई! आखिर किस बात का हुआ था भुगतान?
पंचायत भवन की रंग-पोताई और मरम्मत के मामले में भुगतान तथा कार्य की वास्तविक स्थिति का मिलान सबसे अहम है। यदि मार्च में ही राशि निकाल ली गई थी और काम अक्टूबर में कराया जा रहा है, तो भुगतान की प्रक्रिया की जांच होनी चाहिए। संबंधित बिल किस तारीख को बना, कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र कब जारी हुआ, माप पुस्तिका में काम कब दर्ज किया गया और भुगतान किस आधार पर स्वीकृत हुआ—इन सभी बिंदुओं पर जवाबदेही तय करना जरूरी है। यदि अभिलेखों में काम पूरा दर्शाया गया हो, लेकिन वास्तविकता में काम बाद में कराया गया हो, तो यह गंभीर जांच का विषय होगा।

सिर्फ रंग-पोताई नहीं, 16 भुगतानों का हिसाब भी खंगालने की मांग!
धनगवां पंचायत में मामला केवल पंचायत भवन तक सीमित नहीं है। शिकायत में 15वें वित्त आयोग की राशि से जुड़े 16 अलग-अलग भुगतानों का विवरण देते हुए जांच की मांग की गई है। इनमें दिसंबर 2025, फरवरी 2026, मार्च 2026 और सितंबर 2026 की भुगतान प्रविष्टियां शामिल हैं। शिकायतकर्ता ने प्रत्येक भुगतान के पीछे दर्ज कार्य, स्वीकृत राशि, भुगतान प्राप्तकर्ता और वास्तविक निर्माण की स्थिति का सत्यापन कराने की मांग की है। अब सवाल है कि क्या संबंधित अधिकारी प्रत्येक भुगतान की फाइल खोलकर जांच करेंगे या मामला कागजी कार्रवाई तक ही सीमित रहेगा?

सरपंच-सचिव की भूमिका पर भी उठे सवाल, जिम्मेदारी तय करने की मांग

ग्राम पंचायत के वित्तीय लेनदेन और विकास कार्यों से जुड़े मामले में सरपंच और सचिव की भूमिका सहित सभी संबंधित व्यक्तियों की जिम्मेदारी की जांच जरूरी है। किसने कार्य की स्वीकृति और निष्पादन से जुड़े दस्तावेज तैयार किए, किसने भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई और कार्य पूर्ण होने की पुष्टि किन आधारों पर की गई—इन सवालों की पड़ताल होनी चाहिए। यदि जांच में किसी भी स्तर पर नियमों के उल्लंघन, गलत दस्तावेजों या सरकारी राशि के दुरुपयोग के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित जिम्मेदारों पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
कैशबुक से बैंक स्टेटमेंट तक जांच हो, मौके पर खुले कामों की पोल!
मामले की निष्पक्ष जांच के लिए केवल पंचायत के कागजों की औपचारिक जांच पर्याप्त नहीं होगी। कैशबुक, बैंक स्टेटमेंट, भुगतान रजिस्टर, बिल-वाउचर, माप पुस्तिका और कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र का आपस में मिलान कराने के साथ पंचायत भवन तथा अन्य संबंधित निर्माण कार्यों का भौतिक सत्यापन भी जरूरी है। जांच में यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि स्वीकृत राशि के अनुपात में कितना काम हुआ, सामग्री पर कितना खर्च दर्शाया गया और वास्तविक निर्माण की गुणवत्ता कैसी है।
अब जनपद पंचायत गौरेला से सवाल—जांच कब और कार्रवाई किस पर?
धनगवां पंचायत में उठे इन सवालों के बीच जनपद पंचायत गौरेला के मुख्य कार्यपालन अधिकारी की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। क्या 16 भुगतानों की निष्पक्ष जांच के लिए टीम गठित होगी? क्या पंचायत भवन की रंग-पोताई और मरम्मत का मौके पर सत्यापन कराया जाएगा? क्या भुगतान और कार्य पूर्णता की तारीखों का मिलान होगा? और यदि वित्तीय अनियमितता प्रमाणित होती है, तो क्या जिम्मेदारों से राशि की वसूली कर कार्रवाई की जाएगी?
फिलहाल भ्रष्टाचार के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है, लेकिन भुगतान और काम की अवधि को लेकर उठे सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सरकारी धन जनता के विकास के लिए है, इसलिए उसके उपयोग का हिसाब भी पारदर्शी होना चाहिए। अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी धनगवां पंचायत के मामले में जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाते हैं या नहीं।
लल्लनगुरु न्यूज़ की नजर धनगवां पंचायत के इस मामले पर बनी हुई है।









