कोरबा RES विभाग में टेंडर मैनेजमेंट के आरोप, करोड़ों के कामों पर उठे गंभीर सवाल

कोरबा। ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया को पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा का माध्यम माना जाता है, लेकिन कोरबा जिले के ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (R.E.S.) विभाग में इसी प्रक्रिया को कथित रूप से प्रभावित किए जाने के आरोप सामने आए हैं। सूत्रों और कुछ असंतुष्ट ठेकेदारों के दावों के मुताबिक, पिछले करीब एक वर्ष में करोड़ों रुपये के निर्माण कार्यों की निविदाओं में कथित तौर पर ऐसा खेल किया गया, जिससे पसंदीदा ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने और अन्य प्रतिस्पर्धियों को तकनीकी आधार पर बाहर करने की कोशिश की गई।
आरोपों के मुताबिक, इस पूरे मामले में विभागीय स्तर पर प्रभावशाली अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जरूरत है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

करोड़ों के बजट वाले निर्माण कार्य RES के जिम्मे
जानकारी के अनुसार जिला खनिज न्यास मद (DMF) और डिपॉजिट मद से प्राप्त राशि से ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। इनमें स्कूल भवन, उप स्वास्थ्य केंद्र, हाई स्कूल भवन, महतारी सदन, रेजिडेंशियल हॉस्टल सहित अन्य विकास कार्य शामिल हैं।

इन कार्यों का जिम्मा ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग कोरबा को सौंपे जाने के बाद विभाग के माध्यम से बड़ी संख्या में निविदाएं जारी की गई हैं। आरोप है कि इन्हीं बड़े बजट वाले कार्यों की निविदाओं में कथित रूप से ‘मैनेजमेंट’ का खेल चल रहा है।
ठेकेदारों ने बताई कथित प्रक्रिया

कुछ असंतुष्ट ठेकेदारों का आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में शुरुआत में सब कुछ ऑनलाइन और नियमों के मुताबिक दिखाई देता है। ठेकेदार ऑनलाइन निविदा प्रस्तुत करने के साथ तकनीकी दस्तावेज, TDR, सत्यनिष्ठा शपथ पत्र सहित आवश्यक दस्तावेज तैयार कर विभाग को निर्धारित माध्यम से भेजते हैं।
आरोप है कि टेंडर खुलने के समय प्रारंभिक स्तर पर दस्तावेजों की जांच की जाती है, लेकिन इसके बाद तकनीकी दस्तावेजों की छंटनी में कथित तौर पर मनमानी शुरू हो जाती है।
पसंदीदा ठेकेदार को छोड़कर बाकी को तकनीकी आधार पर बाहर करने का आरोप
ठेकेदारों के मुताबिक, किसी निविदा में यदि 9 से 10 ठेकेदार भाग लेते हैं तो कथित रूप से पहले से तय ठेकेदार को छोड़कर अन्य प्रतिभागियों के दस्तावेजों में अलग-अलग तकनीकी कमियां निकालकर उन्हें अपात्र घोषित करने का आरोप है।
किसी दस्तावेज में सत्यनिष्ठा शपथ पत्र से संबंधित कमी तो किसी में TDR से जुड़ी आपत्ति बताकर निविदा से बाहर करने का दावा किया जा रहा है।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि यह प्रक्रिया कथित रूप से पहले से तय परिणाम के अनुरूप कराई जाती है। ठेकेदारों का दावा है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होने पर निविदा दस्तावेजों, डाक से प्राप्त हार्ड कॉपी, तकनीकी परीक्षण रिपोर्ट और टेंडर समिति की कार्यवाही से वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
क्या कम दर वाले ठेकेदारों को जानबूझकर बाहर किया गया?
यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला सिर्फ टेंडर प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा असर सरकारी धन पर पड़ सकता है। प्रतिस्पर्धी और कम दर की निविदाओं को तकनीकी आधार पर बाहर कर किसी अन्य ठेकेदार को काम दिए जाने से शासन को आर्थिक नुकसान होने की आशंका पैदा होती है।
साथ ही सवाल यह भी है कि यदि निविदा प्रक्रिया में वास्तव में किसी स्तर पर अनुचित हस्तक्षेप हुआ है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी और क्या संबंधित अधिकारियों ने दस्तावेजों की जांच निर्धारित नियमों के अनुसार की?
‘नजराने’ के आरोप भी, जांच हुई तो खुलेगा पूरा खेल
ठेकेदारों की ओर से सबसे गंभीर आरोप कथित आर्थिक लेन-देन को लेकर लगाए गए हैं। दावा किया जा रहा है कि पसंदीदा ठेकेदार को काम दिलाने के लिए विभागीय स्तर पर कथित रूप से ‘नजराना’ पहुंचाया जाता है।
हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि के लिए ठोस दस्तावेज अथवा स्वतंत्र जांच की आवश्यकता है। ऐसे में यह जरूरी है कि प्रशासन केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित न रहे, बल्कि पिछले एक वर्ष में जारी सभी प्रमुख निविदाओं की स्वतंत्र तकनीकी और वित्तीय जांच कराए।
जांच में इन बिंदुओं से खुल सकता है पूरा मामला
यदि जिला प्रशासन मामले की जांच कराता है तो संबंधित निविदाओं में शामिल सभी ठेकेदारों के ऑनलाइन बिड रिकॉर्ड, तकनीकी मूल्यांकन, TDR, सत्यनिष्ठा शपथ पत्र, हार्ड कॉपी प्राप्ति रिकॉर्ड, डाक रसीद, अपात्र किए जाने के कारण, तुलनात्मक विवरण और वर्क ऑर्डर की जांच महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
सवाल यह भी है कि जिन ठेकेदारों को तकनीकी कमियों के आधार पर बाहर किया गया, क्या उन्हीं कमियों को अन्य सफल ठेकेदार के दस्तावेजों में भी समान रूप से जांचा गया था?
अब प्रशासन की निष्पक्ष जांच पर नजर
करोड़ों रुपये के सरकारी निर्माण कार्यों से जुड़े इन आरोपों ने RES विभाग की निविदा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि आरोप निराधार हैं तो विभाग के पास रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट करने का पूरा अवसर है। वहीं यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित ठेकेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई जरूरी होगी।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन, RES के उच्चाधिकारी और संबंधित निगरानी एजेंसियां इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या पिछले एक वर्ष की निविदाओं की स्वतंत्र जांच कराकर कथित ‘टेंडर मैनेजमेंट’ के आरोपों की सच्चाई सामने लाई जाती है।









