गौरेला: 26 साल पहले मृत आदिवासी महिला के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री का आरोप! फर्जी पहचान से करोड़ों की जमीन का सौदा? पुलिस जांच में जुटी, आदिवासी समाज में आक्रोश
शिकायत ने पकड़ा तूल… अभी FIR नहीं, लेकिन विश्व आदिवासी दिवस के बाद बड़े आंदोलन और कानूनी कार्रवाई की तैयारी।

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जिले में कथित फर्जी जमीन रजिस्ट्री का मामला अब केवल एक परिवार का विवाद नहीं रह गया है, बल्कि आदिवासी समाज के सम्मान और अधिकारों से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। गौरेला थाना में दर्ज शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 26 वर्ष पहले मृत्यु हो चुकी एक आदिवासी महिला की पहचान का दुरुपयोग कर उसकी जमीन की रजिस्ट्री कर दी गई। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है, हालांकि अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई है।


शिकायतकर्ता रामवतार गोंड ने अपने आवेदन में बताया है कि उनकी मां नरबदिया बाई का निधन 12 जनवरी 1996 को हो चुका था। मृत्यु के बाद विधिवत फौती नामांतरण भी दर्ज किया गया और उत्तराधिकारियों के नाम राजस्व अभिलेखों में शामिल हो गए थे।
मृत महिला के नाम पर नई पहचान बनाने का आरोप

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इसके बावजूद किसी अन्य महिला ने स्वयं को नरबदिया बाई बताकर आधार कार्ड सहित अन्य पहचान संबंधी दस्तावेज तैयार किए और 3 जून 2026 को पेंड्रारोड उप पंजीयक कार्यालय में संबंधित भूमि की रजिस्ट्री करा दी। शिकायत में इसे सुनियोजित धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन हड़पने की साजिश बताया गया है।


कई लोगों को बनाया गया पक्षकार
आवेदन में कथित महिला, जमीन खरीदने वाली निजी कंपनी के प्रतिनिधि तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों को अनावेदक बनाया गया है। शिकायत के साथ कथित रजिस्ट्री की प्रति और मृतका का मृत्यु प्रमाण-पत्र भी पुलिस को सौंपा गया है।
अभी जांच जारी, FIR का इंतजार
पुलिस मामले से जुड़े दस्तावेजों और तथ्यों की जांच कर रही है। अभी तक किसी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। हालांकि शिकायत में लगाए गए आरोपों की गंभीरता को देखते हुए पूरे घटनाक्रम की पड़ताल जारी है।
अब यह केवल एक परिवार का नहीं, पूरे आदिवासी समाज का मुद्दा
मामले ने अब सामाजिक और जनजातीय स्वरूप ले लिया है। मृत आदिवासी महिला के नाम पर कथित फर्जी रजिस्ट्री के आरोपों से सर्व आदिवासी समाज में भी गहरी नाराजगी बताई जा रही है। समाज के प्रतिनिधि इसे आदिवासी अधिकारों और भूमि सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय मान रहे हैं।

विश्व आदिवासी दिवस के बाद बढ़ सकता है दबाव
जानकारी के अनुसार, विश्व आदिवासी दिवस के कार्यक्रम के बाद सर्व आदिवासी समाज इस मामले में सामूहिक रणनीति बना सकता है। समाज प्रशासन और पुलिस से दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, पूरे रजिस्ट्री प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वालों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग कर सकता है।

सूरजपुर जैसी कार्रवाई की उठ रही मांग
हाल ही में सूरजपुर जिले में भी जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के मामले में तत्कालीन तहसीलदार, पटवारी सहित अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। ऐसे में अब गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में भी यह सवाल उठने लगा है कि यदि जांच में फर्जी दस्तावेज, कूटरचना और धोखाधड़ी के पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो क्या यहां भी उसी तरह सख्त कार्रवाई होगी? इसका जवाब पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगा।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल…
क्या 26 साल पहले मृत हो चुकी महिला के नाम पर वास्तव में रजिस्ट्री हुई? यदि शिकायत सही साबित होती है, तो यह केवल जमीन का विवाद नहीं, बल्कि राजस्व व्यवस्था, दस्तावेज सत्यापन और पंजीयन प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा। अब पूरे जिले की नजर पुलिस जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई है।









