GPM: “एक बिल, दो भुगतान,लाखों का घोटाला” CEO के आदेश को ठेंगा दिखाकर SDO मोहले ने पास किया फर्जी बिल

गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही :- जनपद पंचायत मरवाही में 15वें वित्त की राशि में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आया है। ग्राम पंचायत नरौर के आश्रित ग्राम झिरना पोड़ी में CEO-इंजीनियर द्वारा काम रुकवाने के लिखित आदेश के बाद भी SDO मोहले ने मिलीभगत कर एक ही बिल नं. 713 से दो बार कुल 4 लाख रु का भुगतान करवा दिया।
###पुरानी खबर + नया खुलासा :-

पहले भी खबर प्रकाशित हो चुकी है कि नरौर में भरी बरसात में अवैध पुल निर्माण कराया गया। उस समय CEO मरवाही और इंजीनियर मौके पर पहुंचकर “तत्काल कार्य रोकें” का लिखित आदेश दे चुके थे। साथ ही पुल का हत्था भूमि स्वामी के खेत में 4 फिट अंदर तक बनाए जाने की शिकायत भी थी। अब नए दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि आदेश के बाद भी भुगतान रोकने के बजाय SDO मोहले ने बिल पास कर दिया। इससे स्पष्ट है कि अवैधानिक निर्माण के बाद भी अधिकारियों को सिर्फ “प्रतिशत” से मतलब था।
###फर्जीवाड़े का तरीका :-

बिल क्रमांक 713, दिनांक 28.06.26, फर्म: संकल्प मेटल एण्ड स्टील, बस स्टैण्ड-निमधा
पहला काम:- `RCC पुलिया निर्माण, ग्राम झिरना पोड़ी से पिपरिया पहुंच मार्ग`जिसकी VOUCHER NO : XVFC/2026-27/P/15 है।

दूसरा काम :-नाली निर्माण, ओमप्रकाश मरावी के खेत के पास जिसकी VOUCHER NO : XVFC/2026-27/P/14 है।
PFMS के अनुसार दोनों अलग-अलग कार्यों के लिए दिनांक 20/07/26 और 07/07/26 को सेम बिल नं. 713 लगा कर 2-2 लाख रूपए का भुगतान किया गया है। यानी 2लाख के एक ही बिल से 4 लाख निकाल लिए गए।
###किन नियम-कानूनों की उड़ी धज्जियां :-
1. छ.ग. पंचायत राज अधिनियम 1993, धारा 40 CEO जनपद पंचायत का प्रमुख कार्यकारी अधिकारी है। उसके लिखित आदेश की अवहेलना दंडनीय अपराध है।
2.छ.ग. वित्तीय नियम 2017 एक ही बिल से दो बार भुगतान, फर्जी वाउचर बनाना और फंड का दुरुपयोग गंभीर वित्तीय अनियमितता है।
3.छ.ग. सिविल सेवा आचरण नियम लोक सेवक द्वारा पद का दुरुपयोग कर शासकीय राशि का गबन।
4.PWD मैनुअल बिना तकनीकी स्वीकृति, बिना वर्क ऑर्डर और बरसात में निर्माण व भुगतान प्रतिबंधित।
###ग्रामीणों की कड़ी मांग :-
ग्रामवासियों ने कलेक्टर GPM से मांग की है :-
1.SDO मोहले और सरपंच ग्राम पंचायत नरौर पर तत्काल FIR दर्ज कर निलंबन की कार्रवाई हो।
2.संकल्प मेटल एण्ड स्टील, निमधा का लाइसेंस रद्द कर फर्जी बिल देने पर दुकानदार पर कानूनी कार्रवाई हो।
3. अवैध रूप से निकाली गई लाखो रु की तत्काल रिकवरी हो।
4. पूरे मामले की EOW/आर्थिक अपराध शाखा से जांच कराई जाए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि “15वें वित्त के पैसे से गांव का विकास होना था, लेकिन SDO और सरपंच सचिव की मिलीभगत से उसे लूट लिया गया।”
_नोट: यह खबर प्राप्त बिल, PFMS स्क्रीनशॉट और ग्रामीणों के आरोपों पर आधारित है।









