“पहले ₹2.80 लाख दो, तब मिलेगा TC!” — रायपुर के निजी(Venkateshwar Signature School ) स्कूल पर छात्रा को बंधक बनाने जैसे आरोप?
रायपुर स्थित Venkateshwar Signature School एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में

रायपुर स्थित Venkateshwar Signature School एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की एक छात्रा के परिजनों ने स्कूल प्रबंधन पर खुली दादागिरी, आर्थिक दबाव और छात्रा का टीसी (Transfer Certificate) रोकने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। मामला अब केवल फीस विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह शिक्षा के अधिकार और निजी स्कूलों की मनमानी पर बड़ा सवाल बनता जा रहा है।
“सिर्फ 15 दिन पढ़ी बच्ची, फिर क्यों मांगे जा रहे ₹2.80 लाख?”

कक्षा 9वीं सत्र 2025-26 की छात्रा रही आरवी अब कक्षा 10वीं में प्रवेश ले चुकी है। परिजनों के अनुसार छात्रा ने वर्तमान सत्र में केवल लगभग 15 दिन ही स्कूल की कक्षाएं अटेंड कीं और लगभग 15 दिन ही हॉस्टल में निवास किया। इसके बाद सुरक्षा और व्यक्तिगत कारणों से बच्ची ने उक्त स्कूल में आगे पढ़ाई जारी नहीं रखने का निर्णय लिया। परिवार का कहना है कि वे नियमानुसार जितने दिन बच्ची स्कूल और हॉस्टल में रही, उतने दिनों का वैध शुल्क देने के लिए तैयार हैं। इसके बावजूद स्कूल प्रबंधन द्वारा करीब ₹2 लाख 80 हजार रुपये की भारी रकम मांगी जा रही है और रकम जमा नहीं करने पर टीसी देने से साफ इनकार किया जा रहा है।
“TC नहीं देंगे, जहां शिकायत करनी है कर लो”

परिजनों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन से जुड़े आशीष नामक व्यक्ति द्वारा लगातार आर्थिक दबाव बनाया जा रहा है। परिवार का कहना है कि बच्ची का भविष्य दांव पर लगा हुआ है, लेकिन स्कूल प्रबंधन संवेदनशीलता दिखाने के बजाय वसूली की मानसिकता से काम कर रहा है। मामले में सबसे गंभीर पहलू यह है कि टीसी नहीं मिलने के कारण छात्रा का दूसरे स्कूल में एडमिशन रुक गया है। इससे बच्ची का पूरा शैक्षणिक सत्र प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया है।
निजी स्कूलों की मनमानी पर बड़ा सवाल

शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी छात्र का TC अनावश्यक रूप से रोकना सीधे तौर पर शिक्षा के अधिकार की भावना के विपरीत माना जाता है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) और विभिन्न शिक्षा विभागों के दिशा-निर्देशों में स्पष्ट उल्लेख है कि केवल फीस विवाद के आधार पर छात्र का Transfer Certificate रोकना उचित नहीं माना जाता, विशेषकर तब जब अभिभावक वास्तविक देय शुल्क जमा करने को तैयार हों। कई मामलों में न्यायालय भी यह टिप्पणी कर चुके हैं कि स्कूल प्रबंधन छात्रों के भविष्य को बंधक बनाकर मनमानी वसूली नहीं कर सकते। शिक्षा एक सेवा है, व्यवसायिक वसूली का माध्यम नहीं।
“सुरक्षा को लेकर भी चिंतित थी छात्रा”
परिजनों ने यह भी दावा किया है कि बच्ची विद्यालय परिसर में स्वयं को सुरक्षित महसूस नहीं कर रही थी। इसी कारण परिवार ने उसे अन्यत्र पढ़ाने का निर्णय लिया। लेकिन अब स्कूल प्रबंधन द्वारा कथित रूप से आर्थिक दबाव बनाकर छात्रा और उसके परिवार को परेशान किया जा रहा है।
शिक्षा मंत्री से होगी शिकायत
मामले को लेकर परिवार ने साफ कहा है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे प्रदेश के शिक्षा मंत्री, जिला शिक्षा अधिकारी और राज्य प्रशासन को लिखित शिकायत सौंपेंगे। साथ ही निजी स्कूल की कार्यप्रणाली, फीस वसूली और टीसी रोकने की कार्रवाई की जांच कराने की मांग भी की जाएगी। परिजनों का कहना है कि यदि एक छात्रा के साथ ऐसा व्यवहार हो सकता है, तो न जाने कितने अभिभावक इसी तरह निजी स्कूलों की दबंगई और आर्थिक शोषण का सामना कर रहे होंगे।





