कटघोरा: डैम के गेट खुलवाने की चाल?जल संरक्षण पर हमला या खनन माफियाओं की प्लानिंग—उठे बड़े सवाल
बदबू और बीमारी” के नाम पर फैलाया जा रहा भ्रम, असल मकसद खनन आसान करना?

एनीकट डैम के खिलाफ दुष्प्रचार! रेत माफियाओं की साजिश से कटघोरा का जल भविष्य खतरे में
कटघोरा/कटाईनार:

अहिरन नदी और कटाईनार क्षेत्र में बने एनीकट (स्टॉप डैम) को लेकर फैलाई जा रही नकारात्मक खबरों पर अब बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों और जानकारों का साफ कहना है—यह कोई आम शिकायत नहीं, बल्कि रेत माफियाओं की सोची-समझी साजिश है। बताया जा रहा है कि भीषण गर्मी के बीच जब इन एनीकट डैमों ने कटघोरा क्षेत्र में जल स्तर को बनाए रखा है, तब कुछ संगठित गिरोह जानबूझकर “बदबू और बीमारी” जैसी खबरें प्लांट करवा रहे हैं। मकसद साफ है—डैम के गेट खुलवाना, ताकि नदी का पानी कम हो और अवैध रेत खनन आसानी से किया जा सके।
ग्रामीणों का कहना है कि पहले जहां गर्मी में जल संकट गहराता था, वहीं अब एनीकट डैम के कारण कुएं और हैंडपंप तक सूखने से बच रहे हैं। ऐसे में इन डैमों के खिलाफ माहौल बनाना सीधे-सीधे जनहित पर हमला माना जा रहा है। स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया है कि कुछ पोर्टल बिना जमीनी हकीकत जांचे, माफियाओं के इशारे पर खबरें चला रहे हैं। इससे न सिर्फ लोगों में भ्रम फैल रहा है, बल्कि जल संरक्षण जैसे अहम प्रयासों को भी नुकसान पहुंच रहा है।

विशेषज्ञों का भी स्पष्ट मत है कि एनीकट डैम क्षेत्र के लिए जीवनरेखा हैं। इन्हें कमजोर करने या गेट खुलवाने की कोशिश दीर्घकालीन जल संकट को न्योता देने जैसी होगी। अब मांग उठ रही है कि प्रशासन इस पूरे मामले की जांच करे—
• कौन फैला रहा है भ्रामक खबरें?

• किनके दबाव में डैम के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है?
साथ ही अवैध रेत खनन में शामिल लोगों पर कड़ी कार्रवाई की भी मांग तेज हो गई है।
स्थानीय लोगों की दो टूक चेतावनी:
“डैम से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं होगी… यह हमारे पानी और भविष्य की लड़ाई है।”









