कटघोरा में ‘शुद्ध प्लस’ पैकेज्ड वाटर पर गंभीर सवाल: बिना शुद्धिकरण बोरवेल का पानी बेचने का आरोप, जांच की मांग तेज
बगईनाला स्थित प्लांट में मानकों की अनदेखी का दावा, प्रशासन ने जांच के संकेत दिए

कटघोरा/कोरबा। गर्मी के मौसम में पेयजल की बढ़ती मांग के बीच कटघोरा क्षेत्र में संचालित एक स्थानीय पैकेज्ड वाटर ब्रांड ‘शुद्ध प्लस’ को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि बगईनाला स्थित प्लांट में बोरवेल के पानी को बिना निर्धारित शुद्धिकरण प्रक्रिया के सीधे बोतलों और पाउच में पैक कर बाजार में बेचा जा रहा है।
यदि जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं तो यह उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ बड़ा खिलवाड़ साबित हो सकता है। स्थानीय लोगों और सूत्रों के अनुसार प्लांट से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में एक लीटर की बोतलें, 200 एमएल पाउच और 20 लीटर के जार बाजार में भेजे जा रहे हैं। इन उत्पादों की सप्लाई कटघोरा सहित दीपका, हरदीबाजार और बांकीमोंगरा क्षेत्र तक होने की बात कही जा रही है।

शुद्धिकरण व्यवस्था पर उठे सवाल
सूत्रों का दावा है कि प्लांट में पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर के लिए आवश्यक आधुनिक शुद्धिकरण प्रणालियां जैसे आरओ, यूवी ट्रीटमेंट और ओजोनेशन की व्यवस्था नहीं है। आरोप है कि बोरवेल से निकाले गए पानी को सीमित स्तर पर फिल्टर कर सीधे पैकिंग प्रक्रिया में भेजा जा रहा है। प्लांट में कार्यरत एक कर्मचारी ने नाम सार्वजनिक न करने की शर्त पर बताया कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में बोतलें और पाउच तैयार किए जाते हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

लाइसेंस और गुणवत्ता प्रमाणन पर भी प्रश्न
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि उत्पादों पर अंकित गुणवत्ता मानकों और लाइसेंस संबंधी जानकारी की वैधता की जांच आवश्यक है। पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) तथा खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के नियमों का पालन अनिवार्य होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना निर्धारित परीक्षण और गुणवत्ता नियंत्रण के पैकेज्ड पानी का व्यवसाय गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जताई चिंता
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बिना परीक्षण और उपचारित किए गए भूजल में विभिन्न प्रकार के रासायनिक तत्व और सूक्ष्मजीव मौजूद हो सकते हैं। ऐसे पानी के लगातार सेवन से डायरिया, टाइफाइड, पीलिया और अन्य जलजनित रोगों का खतरा बढ़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार पैकेज्ड वाटर उद्योग में नियमित लैब परीक्षण, बैच रिकॉर्ड और गुणवत्ता निगरानी अत्यंत आवश्यक है। यदि इन प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया जाता तो उपभोक्ताओं की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
उपभोक्ताओं ने भी जताई नाराजगी
क्षेत्र के कुछ उपभोक्ताओं ने दावा किया कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सस्ते पैकेज्ड पानी के उपयोग के बाद स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं सामने आईं। हालांकि इन मामलों का किसी अधिकृत जांच रिपोर्ट से सीधा संबंध अभी स्थापित नहीं हुआ है। दुकानदारों का कहना है कि स्थानीय ब्रांडों में लाभांश अधिक होने के कारण बाजार में उनकी मांग बनी रहती है, जबकि प्रमाणित ब्रांडों का मार्जिन अपेक्षाकृत कम होता है।
प्रशासन ने कहा— शिकायत मिली तो होगी कार्रवाई
मामले को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें अभी तक औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट और स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों को गंभीरता से लिया जाएगा। वहीं प्रशासनिक अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि संबंधित विभागों की संयुक्त टीम द्वारा प्लांट का निरीक्षण कराया जा सकता है। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
उपभोक्ताओं के लिए जरूरी सावधानियां
विशेषज्ञों के अनुसार पैकेज्ड पानी खरीदते समय उपभोक्ताओं को निम्न बिंदुओं पर विशेष ध्यान देना चाहिए—
* बोतल पर अंकित BIS/ISI प्रमाणन की जांच करें।
* FSSAI लाइसेंस नंबर और निर्माण तिथि अवश्य देखें।
* पैकिंग सील टूटी हुई न हो।
* निर्माता का पूरा पता और बैच नंबर उपलब्ध हो।
* अत्यधिक सस्ते या संदिग्ध ब्रांडों से सावधानी बरतें।
संचालक पक्ष का इंतजार
खबर प्रकाशित होने तक ‘शुद्ध प्लस’ ब्रांड के संचालकों का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। संपर्क के प्रयास किए गए, लेकिन जिम्मेदार प्रतिनिधि उपलब्ध नहीं हो सके। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
(नोट: खबर में उल्लिखित आरोप स्थानीय स्रोतों और प्राप्त जानकारियों पर आधारित हैं। तथ्यों की अंतिम पुष्टि सक्षम जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी।)









