शुद्ध प्लस’ पर खुलासे के बाद भी प्रशासन खामोश: आखिर किसके संरक्षण में बिक रहा ‘बीमारी वाला पानी’?
खुलासे के बाद भी धड़ल्ले से जारी है जहरीली सप्लाई

कटघोरा/कोरबा। कटघोरा के बगईनाला स्थित ‘शुद्ध प्लस’ पैकेज्ड वॉटर प्लांट को लेकर हुए गंभीर खुलासे के कई दिन बीत जाने के बाद भी प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग गहरी नींद में सोया हुआ है। स्थानीय मीडिया द्वारा मामले को उजागर किए जाने के बाद उम्मीद थी कि जिम्मेदार अधिकारी तुरंत एक्शन मोड में आएंगे, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। अब तक न तो प्लांट की जांच हुई है और न ही पानी के सैंपल लिए गए हैं, जिससे स्थानीय जनता में भारी उबाल है।
खुलासे के बाद भी धड़ल्ले से जारी है जहरीली सप्लाई

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मीडिया में खबर आने के बाद भी प्लांट संचालकों के हौसले बुलंद हैं। रोजाना की तरह भारी मात्रा में 1 लीटर की बोतलें, पाउच और 20 लीटर के जार कटघोरा, दीपका, हरदीबाजार और बांकीमोंगरा जैसे क्षेत्रों में धड़ल्ले से सप्लाई किए जा रहे हैं। सीधे जनता की सेहत से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर प्रशासन की रहस्यमयी चुप्पी कई बड़े सवाल खड़े कर रही है। लोग हैरान हैं कि जब मामला सीधे जिंदगी और मौत से जुड़ा है, तब भी जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं।
खाद्य सुरक्षा विभाग का ‘लिखित शिकायत’ वाला पुराना बहाना

इस पूरे मामले में खाद्य सुरक्षा विभाग का रवैया सबसे ज्यादा संदेहास्पद नजर आता है। सूत्रों के मुताबिक, विभाग अब भी “लिखित शिकायत” मिलने का तकनीकी बहाना बना रहा है, जबकि खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत अधिकारियों को यह स्पष्ट अधिकार है कि वे किसी भी मीडिया रिपोर्ट या जनहित के मामले पर स्वतः संज्ञान लेकर तत्काल औचक निरीक्षण कर सकते हैं। इसके बावजूद जांच की फाइल आगे न बढ़ना यह साफ इशारा करता है कि मामला कहीं न कहीं रसूखदारों के दबाव या किसी खास संरक्षण से जुड़ा हुआ है।
क्या सबूत मिटाने के लिए दिया जा रहा है वक्त?

स्थानीय नागरिकों ने सीधे तौर पर प्रशासन की नीयत पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि कार्रवाई में जानबूझकर देरी की जा रही है। लोगों का कहना है कि खबर छपने के तुरंत बाद प्लांट को सील किया जाना चाहिए था, लेकिन विभाग ने मौन साधकर प्लांट संचालकों को अपनी कमियां छिपाने, मशीनें व्यवस्थित करने और सबूत मिटाने का पूरा मौका दे दिया है। यदि विभाग निष्पक्ष जांच करना चाहता, तो अब तक पानी के सैंपल लैब भेजे जा चुके होते।
गर्मी के सीजन में बीमारियों का बढ़ा खतरा
इस भीषण गर्मी में शादियों, होटलों, ढाबों और घरेलू आयोजनों में पैकेज्ड पानी की मांग चरम पर है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बिना आरओ, यूवी और ओजोनेशन ट्रीटमेंट के सीधे बोरवेल का दूषित पानी बोतलों में भरकर बेचना सीधे तौर पर टाइफाइड, पीलिया, उल्टी-दस्त और पेट के गंभीर संक्रमण जैसी घातक बीमारियों को आमंत्रण देना है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग की यह लापरवाही लोगों के डर और गुस्से को दोगुना कर रही है।
आंदोलन की राह पर जनता, प्रशासन के सामने खड़े हैं गंभीर सवाल
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि अगले कुछ दिनों के भीतर प्लांट की निष्पक्ष जांच कर सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो वे कलेक्टर कार्यालय का उग्र घेराव करेंगे। कटघोरा क्षेत्र में अब हर तरफ यही चर्चा है कि क्या ‘शुद्ध प्लस’ प्लांट के पास वैध बीआईएस और एफएसएसएआई लाइसेंस मौजूद हैं? यदि लाइसेंस हैं, तो प्रशासनिक अधिकारी उनकी सार्वजनिक जांच करने से क्यों कतरा रहे हैं? और यदि लाइसेंस नहीं हैं, तो बिना शुद्धिकरण के पानी बेचने का यह अवैध कारोबार आखिर किसके राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण में इतने लंबे समय से फल-फूल रहा है। अब देखना यह होगा कि इस रिपोर्ट के बाद जिला प्रशासन जागता है या कटघोरा की जनता को इस ‘बीमारी वाले पानी’ के भरोसे छोड़ दिया जाता है।









