दोषपूर्ण जांच पर हाईकोर्ट व पंचायत मंत्रालय से राहत, RES के कार्यपालन अभियंता अशोक कुमार जोगी सहित 7 पर कार्रवाई पर लगी रोक
मनरेगा कार्यों में फर्जी सत्यापन कर वित्तीय अनियमितता का मामला

Chhattisgarh: नवगठित शक्ति जिले के डबरा ब्लॉक अंतर्गत एक ग्राम पंचायत में कथित फर्जी सत्यापन के मामले में की गई जांच और कार्रवाई पर फिलहाल रोक लग गई है। इस प्रकरण में मनरेगा कार्यों से जुड़े अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए RES के वर्तमान कार्यपालन अभियंता अशोक कुमार जोगी सहित कुल 7 अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों पर आरोप तय किए गए थे।
जिन लोगों पर आरोप तय हुए थे, उनमें सब इंजीनियर, जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ), संबंधित ग्राम पंचायत के सरपंच, एसडीओ तथा कार्यक्रम अधिकारी शामिल हैं। आरोप था कि मनरेगा कार्यों में फर्जी सत्यापन कर वित्तीय अनियमितता की गई है।

हालांकि, आरोपित पक्षों का कहना था कि बिना कार्यस्थल पर सामग्री एवं कराए गए कार्यों का समुचित निरीक्षण और सत्यापन किए ही जांच पूरी कर ली गई और जल्दबाजी में आरोप तय कर दिए गए। इसे उन्होंने दोषपूर्ण और एकतरफा जांच बताया।
इसी के विरोध में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव के समक्ष अपील प्रस्तुत की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए सचिव ने प्रारंभिक तौर पर जांच प्रक्रिया और कार्रवाई पर तत्काल प्रभाव से स्थगन (स्टे) आदेश जारी कर दिया।

इसके साथ ही ग्राम पंचायत के सरपंच द्वारा मामले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई, जिसमें दोषपूर्ण जांच को निरस्त करने और कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की गई थी। इस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए जांच और संबंधित कार्रवाई पर अंतरिम स्थगन आदेश जारी कर दिया है।
इस घटनाक्रम के बाद संबंधित सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को फिलहाल राहत मिली है, जबकि मामले की आगे की सुनवाई और जांच की दिशा अब न्यायालय एवं शासन के आगामी निर्देशों पर निर्भर करेगी।









