कोरबा में CBI की दस्तक: फर्जी मुआवजा घोटाले में जांच तेज, 152 अपात्रों से पूछताछ_
प्रशासनिक कर्मचारी मनोज गोभिल के परिवार की भूमिका भी जांच के दायरे में

कोरबा। कोयलांचल क्षेत्र में फर्जी मुआवजा घोटाले को लेकर एक बार फिर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) सक्रिय हो गई है। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की गेवरा-दीपका परियोजना से प्रभावित ग्राम मलगांव के मुआवजा मामलों में तीन दिनों से जांच जारी है।
सूत्रों के अनुसार, CBI टीम में शामिल एक डीएसपी समेत अन्य अधिकारी गेवरा हाउस में डेरा डाले हुए हैं और कथित गड़बड़ियों की गहन पड़ताल कर रहे हैं। इस मामले में पहले ही श्रमिक नेता श्यामू जायसवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है, लेकिन आगे की कार्रवाई अब तक लंबित थी।

152 अपात्रों की सूची पर फोकस
CBI ने उन 152 लोगों को विशेष रूप से तलब किया है जिन्हें अपात्र घोषित कर मुआवजा से वंचित किया गया था। इन ग्रामीणों का दावा है कि वे वास्तविक भूविस्थापित हैं और पुराने निवासी होने के बावजूद साजिशन उन्हें सूची से बाहर किया गया। आरोप है कि कुछ जमीन दलालों और अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी मुआवजा प्रकरण तैयार किए गए।

मनोज गोभिल परिवार पर भी जांच
प्रशासनिक कर्मचारी मनोज गोभिल के परिवार की भूमिका भी जांच के दायरे में है। जानकारी के मुताबिक, परिवार के नाम पर पांच फर्जी मुआवजा पत्रक बनाए गए थे, जिन पर सत्यापन अधिकारियों के हस्ताक्षर और सील भी दर्ज थे। मामला सामने आने के बाद इन पत्रकों को निरस्त कर दिया गया, जिससे करोड़ों रुपए के संभावित फर्जी भुगतान को रोका जा सका।

अधिकारियों को नोटिस, बयान दर्ज
CBI राजस्व विभाग, SECL अधिकारियों, तहसीलदारों, ग्राम कोटवारों और प्रभावित ग्रामीणों के बयान दर्ज कर रही है। जो अधिकारी या संबंधित व्यक्ति उपस्थित नहीं हो रहे, उन्हें नोटिस जारी कर तलब किया जा रहा है। साथ ही मौके का निरीक्षण और जमीन की नाप-जोख भी कराए जाने की संभावना है।
जांच से मची हलचल
जांच में तेजी आने से पूरे कोयलांचल क्षेत्र में हलचल मच गई है। फर्जीवाड़े में शामिल लोगों में चिंता बढ़ गई है, जबकि न्याय की उम्मीद लगाए बैठे प्रभावित ग्रामीणों में नई उम्मीद जगी है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आगे कितनी जल्दी और किन-किन लोगों के खिलाफ कार्रवाई होती है।









