महा-खुलासा: मरवाही जनपद में ‘कागजी विकास’ का संगठित सिंडिकेट, 15 फाइलों में कैद भ्रष्टाचार की पूरी कुंडली
: 15 फाइलों का ‘माइक्रो ऑडिट’ – भ्रष्टाचार के 4 बड़े पैटर्न?

विशेष खोजी रिपोर्ट: गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) |रितेश गुप्ता- मरवाही जनपद पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर एक संगठित भ्रष्टाचार तंत्र (Syndicate) संचालित होने का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। आधिकारिक 15 Measurement Books (MB) और ‘सर्व शिक्षा अभियान’ के बैंक रिकॉर्ड्स के गहन विश्लेषण में सामने आया है कि करोड़ों रुपए का खर्च सिर्फ कागजों में दिखाया गया, जबकि जमीनी हकीकत शून्य है। यह रिपोर्ट प्रशासनिक अधिकारियों और तकनीकी कर्मचारियों की संभावित मिलीभगत की गंभीर आशंका को उजागर करती है।
भाग 1: 15 फाइलों का ‘माइक्रो ऑडिट’ – भ्रष्टाचार के 4 बड़े पैटर्न

1. बैक-डेटिंग और भुगतान का खेल
• तथ्य: वर्ष 2021-22 में स्वीकृत कार्यों का मूल्यांकन जनवरी 2025 तक किया गया।

• संदेह: सीसी रोड और पुलिया जैसे कार्य 3 साल तक लंबित नहीं रहते।
• निष्कर्ष: पुराने या पहले से निर्मित कार्यों को नया दर्शाकर राशि आहरित की गई।

2. मजदूरी मद में हेराफेरी (80:20 का उल्टा अनुपात)
• तथ्य: अधिकांश फाइलों में 80% खर्च सामग्री पर दर्शाया गया।
• नियम: मजदूरी का हिस्सा 40–60% होना चाहिए।
• संकेत: मजदूरों के भुगतान में कटौती कर फर्जी वेंडर बिलों के जरिए राशि निकासी।
3. हार्डवेयर दुकानों के जरिए फर्जी भुगतान
• तथ्य: सफाई और पेयजल कार्यों के लिए हार्डवेयर दुकानों को भुगतान।
• नियम उल्लंघन: ऐसे कार्यों में हार्डवेयर भुगतान वित्तीय संहिता के खिलाफ है।
• निष्कर्ष: बिना कार्य के भुगतान का आसान माध्यम।
4. ‘कागजी पूर्णता’ – जमीन पर गायब काम
• तथ्य: कई कार्यों को कागजों में पूर्ण दर्शाया गया।
• जमीनी स्थिति: भौतिक अस्तित्व और गुणवत्ता संदिग्ध।
• निष्कर्ष: फर्जी पूर्णता प्रमाण पत्र के आधार पर भुगतान।
भाग 2: शिक्षा मद में 90 लाख की संदिग्ध निकासी
हस्ताक्षर अधिकार का दुरुपयोग
• BRC की जगह BEO को सेकंड सिग्नेटरी बनाया गया।
निजी खातों में ट्रांसफर
• सरकारी राशि कर्मचारियों और सचिवों के व्यक्तिगत खातों में भेजी गई।
• खर्च दर्शाया गया: पेट्रोल, यात्रा, आकस्मिक व्यय।
कानूनी स्थिति
• सरकारी धन का निजी खातों में ट्रांसफर गंभीर वित्तीय अनियमितता और गबन की श्रेणी में आता है।
कानूनी और प्रशासनिक सवाल
छत्तीसगढ़ वित्तीय संहिता के अनुसार:
• हर भुगतान से पहले भौतिक सत्यापन अनिवार्य है
• यहाँ इस प्रक्रिया की स्पष्ट अनदेखी दिखाई देती है
उपयंत्री द्वारा दर्ज माप और उच्च अधिकारियों की स्वीकृति एक संभावित संगठित तंत्र की ओर इशारा करती है।
सबसे बड़ा सवाल
क्या जिला प्रशासन इन तथ्यों पर संज्ञान लेगा?
या फिर यह ‘कागजी विकास’ फाइलों में ही दबा रहेगा?
साक्ष्य आधार
• 15 आधिकारिक MB रिकॉर्ड
• मूल्यांकन प्रतियां
• SSA बैंक ट्रांजेक्शन
• संबंधित ग्राम पंचायतों के दस्तावेज









