क्लिनिक की आड़ में ‘अस्पताल’ का खेल! GPM में BMO पर गंभीर आरोप, नियमों की खुलेआम अनदेखी?
अवैध लैब संचालन, मरीजों की सुरक्षा पर खतरा, BMO पर उठे सवाल, ‘रक्षक ही भक्षक’ की स्थिति?

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही | विशेष रिपोर्ट-छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले में स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे नियमों को ताक पर रखकर एक कथित अवैध स्वास्थ्य संस्थान संचालित किए जाने का मामला सामने आया है। कलेक्ट्रेट कार्यालय से महज 100 मीटर की दूरी पर चल रहे इस ‘क्लिनिक’ में कागजों पर भले ही सामान्य ओपीडी सेवाएं दिखाई जाती हों, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। यहाँ बाकायदा बिस्तरों के साथ एक छोटे अस्पताल या नर्सिंग होम जैसा पूरा सेटअप खड़ा कर दिया गया है।?


नर्सिंग होम एक्ट की अनदेखी, क्लिनिक में भर्ती हो रहे मरीज
नियमों के मुताबिक, किसी भी क्लिनिक को बिस्तरयुक्त अस्पताल या नर्सिंग होम के रूप में संचालित करने के लिए अलग से पंजीकरण और निर्धारित मानकों का पालन अनिवार्य होता है। लेकिन इस संस्थान में बिना वैध अनुमति के मरीजों को भर्ती करने और उपचार देने का आरोप है, जो सीधे तौर पर नर्सिंग होम एक्ट का उल्लंघन माना जा रहा है।?


दवाइयों का जखीरा, मुनाफाखोरी के आरोप

सूत्रों के अनुसार, इस क्लिनिक में बड़ी मात्रा में दवाइयों का स्टॉक रखा गया है। आरोप है कि कम कीमत वाली जेनरिक या सस्ती दवाइयों को ऊंचे दामों पर मरीजों को बेचा जा रहा है। यदि यह सही पाया जाता है, तो यह ड्रग कंट्रोल नियमों का गंभीर उल्लंघन होगा।?

अवैध लैब संचालन, मरीजों की सुरक्षा पर खतरा
मामले में यह भी सामने आया है कि संस्थान के भीतर बिना मानक और बिना योग्य विशेषज्ञों के एक पैथोलॉजी लैब संचालित की जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की लैब में जांच कराना मरीजों की सेहत के साथ सीधा खिलवाड़ है।?

BMO पर उठे सवाल, ‘रक्षक ही भक्षक’ की स्थिति
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और गंभीर सवाल गौरेला के ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी (BMO) डॉ. सतीश कुमार अर्गल की भूमिका को लेकर उठ रहा है। एक ओर वे पूरे ब्लॉक के स्वास्थ्य संस्थानों की निगरानी और कार्रवाई के लिए जिम्मेदार हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हीं के ऊपर इस तरह के संस्थान से जुड़े होने के आरोप लग रहे हैं। यह स्थिति ‘हितों के टकराव’ (Conflict of Interest) का स्पष्ट उदाहरण मानी जा रही है, जहाँ नियामक ही नियमों के उल्लंघन में संलिप्त दिखाई दे रहा है।?

पत्नी की भूमिका भी सवालों के घेरे में
मामले में डॉ. अर्गल की पत्नी डॉ. सीमा अर्गल की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, वे एक त्रिवर्षीय पाठ्यक्रम से प्रशिक्षित चिकित्सक हैं और वर्तमान में साधवानी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ हैं। आरोप है कि इस पूरे संचालन में उनका भी सहयोग रहा है।?

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरा मामला कलेक्ट्रेट जैसे अति-संवेदनशील क्षेत्र से महज 100 मीटर की दूरी पर चल रहा है। इसके बावजूद अब तक प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।!?

क्या हैं जरूरी लाइसेंस?
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के संस्थान के लिए बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट, फायर सेफ्टी, नर्सिंग होम एक्ट के तहत पंजीकरण सहित कई जरूरी लाइसेंस अनिवार्य होते हैं। फिलहाल, इन सभी मानकों के पालन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।!?

अब आगे क्या?
एक ओर सरकार ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर ऐसे मामलों से उन दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं—क्या निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला जाएगा।?









