बलरामपुर में पटवारियों पर गिरी गाज, कोरबा में संघ जिला अध्यक्ष निलंबित; गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में कब होगी पटवारियों पर निलंबन की कार्रवाई? हड़ताल की भेंट चढ़ी छात्रा की छात्रवृत्ति, सैकड़ों लोग परेशान—जवाबदेही पर बड़ा सवाल!

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। सरकारी व्यवस्था में जब कर्मचारियों की हड़ताल के कारण आम जनता के जरूरी काम ठप पड़ने लगें और इसका खामियाजा विद्यार्थियों को अपनी छात्रवृत्ति गंवाकर भुगतना पड़े, तब सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर जनता की परेशानी का जिम्मेदार कौन है? बलरामपुर जिले में पटवारियों के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई हो चुकी है,कोरबा में संघ जिला अध्यक्ष को निलंबित कर दिया गया है ,लेकिन गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में राजस्व व्यवस्था प्रभावित होने के बावजूद अब तक ऐसी जवाबदेही की कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आखिर यहां जिला प्रशासन कब सख्ती दिखाएगा?
मामला सिर्फ सरकारी दफ्तरों में कामकाज प्रभावित होने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर आम नागरिकों के भविष्य और उनके अधिकारों पर पड़ रहा है। इसका उदाहरण परासी निवासी कीर्ति है, जो JK ग्रुप ऑफ इंस्टिट्यूट में अध्ययनरत है। छात्रा को छात्रवृत्ति का लाभ लेने के लिए आय प्रमाण पत्र बनवाना था। निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रमाण पत्र जमा करना अनिवार्य था, लेकिन पटवारियों की हड़ताल के कारण उसका आय प्रमाण पत्र समय पर नहीं बन सका। नतीजा यह हुआ कि छात्रवृत्ति आवेदन की अंतिम तारीख निकल गई और कीर्ति छात्रवृत्ति के लाभ से वंचित रह गई।

सोचने वाली बात है कि जिस छात्रा को पढ़ाई में आर्थिक सहायता मिलनी थी, वह सरकारी व्यवस्था की बाधा के कारण उस लाभ से ही वंचित हो गई। उसके परिवार के लिए यह महज एक प्रमाण पत्र का मामला नहीं, बल्कि पढ़ाई से जुड़ी आर्थिक सहायता का सवाल है। अब यदि छात्रवृत्ति की समय सीमा समाप्त हो चुकी है, तो क्या संबंधित विभाग उसकी कोई वैकल्पिक व्यवस्था करेगा? क्या विशेष अनुमति से आवेदन स्वीकार कराने का प्रयास होगा? या फिर छात्रा को यह कहकर छोड़ दिया जाएगा कि समय निकल चुका है?
सैकड़ों लोग भटक रहे, राजस्व व्यवस्था पर किसकी नजर?

कीर्ति का मामला एक उदाहरण भर है। जिले में आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र, नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा और अन्य राजस्व संबंधी कार्यों के लिए आम नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई ऐसे काम हैं जिनकी समय सीमा निर्धारित होती है। समय पर प्रमाण पत्र या राजस्व दस्तावेज नहीं मिलने से विद्यार्थियों, किसानों, नौकरी के अभ्यर्थियों और आम नागरिकों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
किसी विद्यार्थी को छात्रवृत्ति के लिए प्रमाण पत्र चाहिए, किसी अभ्यर्थी को भर्ती प्रक्रिया में दस्तावेज जमा करना है, तो किसी किसान को जमीन संबंधी काम पूरा कराना है। ऐसे में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली प्रभावित होने का सीधा खामियाजा जनता को भुगतना पड़ता है।

सवाल यह भी है कि जब प्रशासन को पता है कि हड़ताल के कारण कामकाज प्रभावित हो रहा है, तो आम नागरिकों के जरूरी कार्यों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई? क्या जिले में ऐसे विद्यार्थियों और जरूरतमंद लोगों की पहचान की गई, जिनकी समय सीमा प्रमाण पत्र नहीं बनने के कारण निकल गई? क्या प्रभावित आवेदनों का कोई रिकॉर्ड तैयार किया गया?
बलरामपुर में कार्रवाई, GPM में इंतजार क्यों?
बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) द्वारा 1 नवंबर 2026 को पटवारी धीरेंद्र उरमलिया के निलंबन का आदेश जारी किया गया। आदेश में 15 दिनों से अधिक समय तक निर्धारित मुख्यालय में अनुपस्थित रहने, बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद कर्तव्य पर उपस्थित नहीं होने और कार्यभार ग्रहण नहीं करने का उल्लेख किया गया है। आदेश में संबंधित सेवा नियमों के तहत निलंबन की कार्रवाई की गई है।
जब बलरामपुर में प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही के मामले में कार्रवाई का उदाहरण सामने आ सकता है, तो गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में राजस्व कार्यों के प्रभावित होने और आम जनता की परेशानियों के बीच जवाबदेही तय करने की पहल क्यों नहीं दिखाई दे रही?
यहां सवाल किसी कर्मचारी के आंदोलन करने के अधिकार का विरोध करना नहीं है। कर्मचारियों को अपनी मांगों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने का अधिकार है, लेकिन उस दौरान आम जनता के जरूरी कार्यों की व्यवस्था सुनिश्चित करना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है। आखिर सरकारी व्यवस्था जनता की सुविधा के लिए है या जनता को कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच चक्कर काटने के लिए छोड़ देने के लिए?
कोरबा में राजस्व पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष मिथलेश कुमार वर्मा को रविवार को कलेक्टर ने शासकीय कार्यदायित्वों के प्रति लापरवाही उदासीनता बरतने कारण बताओ नोटिस का समय पर संतुष्टिकारक जवाब प्रस्तुत नहीं करने पर सिविल सेवा आचरण नियमों के विपरीत कार्य व्यवहार पाए जाने पर निलंबित कर दिया है
सीधे सवाल!
परासी की छात्रा कीर्ति की छात्रवृत्ति का नुकसान हुआ, इसकी जवाबदेही कौन लेगा? क्या जिला प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि छात्रा को विशेष अनुमति या अन्य वैधानिक विकल्प के माध्यम से छात्रवृत्ति का लाभ मिल सके?
हड़ताल के कारण प्रभावित हुए विद्यार्थियों, किसानों और आम नागरिकों के मामलों की समीक्षा कब होगी? जरूरी प्रमाण पत्रों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं बनाई गई? क्या राजस्व विभाग के कामकाज की समीक्षा कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाएगी? क्या बलरामपुर की तरह यहां भी नियमों के तहत लापरवाही के मामलों में कार्रवाई होगी?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि बलरामपुर में पटवारियों के निलंबन की कार्रवाई हो सकती है, तो गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में जनता की परेशानी पर प्रशासन कब जवाब देगा?
सरकारी कर्मचारियों की मांगें अपनी जगह हैं, लेकिन किसी गरीब परिवार की बेटी की छात्रवृत्ति छूट जाना, किसी किसान का जरूरी काम अटक जाना और किसी जरूरतमंद का प्रमाण पत्र समय पर नहीं बन पाना सामान्य प्रशासनिक समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
जनता को आश्वासन नहीं, व्यवस्था चाहिए। विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र चाहिए, किसानों को राजस्व सेवाएं चाहिए और आम नागरिकों को समय पर सरकारी काम चाहिए। अब जिला प्रशासन को बताना होगा कि जनता को राहत कब मिलेगी और लापरवाही की जवाबदेही आखिर किसकी तय होगी?









