बिलासपुर निवासी रितेश पर GPM में 4.58 लाख की कथित ठगी का आरोप! भरोसे में लेकर महिला से लिए लाखों रुपये, अब लौटाने से इनकार; गौरेला थाने पहुंची पीड़िता

आपसी जान-पहचान और भरोसे की आड़ में 4.58 लाख की कथित ठगी! जरूरत बताकर लिए पैसे, अब लौटाने से इनकार; पीड़िता बोली– एक रुपया भी वापस नहीं मिला
गौरेला। भरोसा और इंसानियत… जब इन्हीं को आर्थिक फायदा उठाने का जरिया बना लिया जाए तो पीड़ित के सामने न्याय के लिए संघर्ष करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता। गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में ऐसा ही एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां आपसी जान-पहचान और विश्वास के आधार पर आर्थिक मदद करने वाली एक महिला ने 4 लाख 58 हजार रुपये की कथित ठगी का आरोप लगाया है। पीड़िता
महिला का आरोप है कि रितेश जायसवाल ने जरूरत का हवाला देकर उससे लाखों रुपये लिए, लेकिन अब रकम लौटाने की बारी आई तो साफ इनकार कर दिया। हद तो तब हो गई जब पीड़िता के मुताबिक उसे यह तक कह दिया गया कि अब एक रुपया भी वापस नहीं मिलेगा।

शिकायत के मुताबिक, महिला और रितेश जायसवाल के बीच आपसी जान-पहचान थी। एक-दूसरे के घर आना-जाना और विश्वास का संबंध होने के कारण पीड़िता को आरोपी पर भरोसा था। इसी भरोसे के आधार पर रितेश जायसवाल ने जरूरी काम का हवाला देते हुए आर्थिक मदद मांगी। पीड़िता का कहना है कि उसने 29 सितंबर 2025 को तीन किश्तों में 30 हजार, 20 हजार और 20 हजार रुपये तथा 17 अक्टूबर 2025 को 38 हजार रुपये फोन-पे के माध्यम से आरोपी के मोबाइल नंबर 7999094493 पर भेजे। इस तरह डिजिटल भुगतान के जरिए कुल 1 लाख 8 हजार रुपये दिए गए।
लेकिन आर्थिक मदद का सिलसिला यहीं नहीं थमा। शिकायतकर्ता के अनुसार उसने एक लाख रुपये ब्याज सहित स्टाम्प पेपर पर लिखित लेन-देन के आधार पर दिए। इसके अलावा आरोपी की जरूरत पूरी करने के लिए IDFC बैंक गौरेला से अपने नाम पर 2 लाख रुपये का पर्सनल लोन तक ले लिया। अपनी जमा पूंजी से 50 हजार रुपये भी दिए। यानी किसी दूसरे की आर्थिक जरूरत पूरी करने के लिए महिला ने अपनी जमा पूंजी ही नहीं लगाई, बल्कि खुद बैंक की कर्जदार भी बन गई।

खुद बैंक से लिया दो लाख का कर्ज, अब महिला भर रही किश्तें!
इस पूरे मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि पीड़िता के मुताबिक आरोपी की आर्थिक जरूरत पूरी करने के लिए उसने बैंक से पर्सनल लोन लिया था। आज बैंक की किश्तों और ब्याज का बोझ महिला पर है। जिस व्यक्ति की मदद के लिए उसने अपनी आर्थिक स्थिति दांव पर लगाई, उसी से अपनी रकम वापस पाने के लिए उसे पुलिस की शरण लेनी पड़ रही है। सवाल यह है कि आखिर किसी के विश्वास और आर्थिक मजबूरी का इस तरह फायदा उठाने के आरोप कितने गंभीर नहीं हैं?

अगस्त 2026 तक मांगा समय, फिर कथित तौर पर कहा– एक रुपया भी नहीं दूंगा!
पीड़िता के आवेदन में उल्लेख है कि रकम वापस मांगने पर रितेश जायसवाल ने अगस्त 2026 तक का समय मांगा था। महिला ने उसके आश्वासन पर इंतजार किया, लेकिन समय बीतने के बाद जब उसने अपनी रकम वापस मांगी तो कथित तौर पर आरोपी ने भुगतान करने से साफ इनकार कर दिया। पीड़िता का आरोप है कि उसे अपने परिचित व्यक्ति के माध्यम से फोन पर डराने का प्रयास भी किया गया और कहा गया कि थाने में रिपोर्ट कर दो, अब एक रुपया भी वापस नहीं मिलेगा।
फोन-पे ट्रांजेक्शन, स्टाम्प पेपर और बैंक लोन… पुलिस के सामने जांच के कई अहम आधार!
इस मामले में केवल मौखिक आरोप ही नहीं, बल्कि पीड़िता ने डिजिटल भुगतान, स्टाम्प पेपर पर लिखित लेन-देन और बैंक से लिए गए पर्सनल लोन का हवाला दिया है। ऐसे में पुलिस के सामने यह जांचना महत्वपूर्ण होगा कि रकम किस उद्देश्य से ली गई, क्या शुरुआत से ही भुगतान नहीं करने की मंशा थी, किस खाते में रकम पहुंची और रकम का वास्तविक इस्तेमाल किसने किया। यदि धोखाधड़ी के आवश्यक तत्व और साक्ष्य सामने आते हैं तो संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब गौरेला पुलिस से सवाल: क्या पीड़िता को मिलेगा न्याय?
पीड़िता ने थाना प्रभारी, आरक्षी केंद्र गौरेला को आवेदन देकर पूरे मामले में FIR दर्ज करने, वित्तीय लेन-देन की जांच करने और कथित धमकी के संबंध में कार्रवाई करने की मांग की है। महिला का आरोप है कि विश्वास में दी गई 4 लाख 58 हजार रुपये की रकम वापस नहीं मिल रही है और अब उसे मानसिक एवं आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अब देखना होगा कि गौरेला पुलिस इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेती है। क्या फोन-पे ट्रांजेक्शन, बैंक लोन और स्टाम्प पेपर के आधार पर निष्पक्ष जांच होगी? क्या पीड़िता को उसकी रकम वापस दिलाने के लिए कानून के तहत उचित कार्रवाई की जाएगी? या फिर एक महिला अपनी ही मेहनत की कमाई वापस पाने के लिए दफ्तरों के चक्कर काटती रहेगी?
फिलहाल मामले में शिकायतकर्ता के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस जांच बाकी है। आरोपी रितेश जायसवाल का पक्ष भी सामने नहीं आया है। उसका पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।









