पोड़ी उपरोड़ा बीईओ की मनमानी बेलगाम, शासन के आदेश को दरकिनार कर फिर किया मनमाना संलग्नीकरण, लोक शिक्षण संचालनालय के आदेश को बताया ठेंगा

पोड़ी उपरोड़ा बीईओ की मनमानी बेलगाम, शासन के आदेश को दरकिनार कर फिर किया मनमाना संलग्नीकरण, लोक शिक्षण संचालनालय के आदेश को बताया ठेंगा
0 55- 60 किमी. दूर प्रधान पाठक का तबादला, शाला समिति और उपसरपंच के प्रस्ताव का हवाला देकर नियमों की उड़ाई धज्जियां.
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कोरबा/पोड़ी उपरोड़ा:-जिले के पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड में शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर बीईओ के. राजेश्वर दयाल की हठधर्मिता की भेंट चढ़ गई है तथा शासन- प्रशासन के स्पष्ट आदेशों के बाद भी बीईओ अपनी मनमानी से बाज नहीं आ रहे हैं। यह मामला प्राथमिक शाला दुल्लापुर प्रधान पाठक के मनमाने संलग्नीकरण का है, जो न केवल नियम विरुद्ध है, बल्कि कलेक्टर के फटकार के बाद भी सुधरने का नाम नहीं ले रहे बीईओ की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

लोक शिक्षण संचालनालय, छत्तीसगढ़ द्वारा 15 जुलाई 2026 को स्पष्ट आदेश जारी किया गया था कि जिले में कहीं भी संलग्न सभी गैर- शैक्षणिक कर्मचारियों को एक सप्ताह के भीतर अपने मूल संस्था में वापस भेजा जाए। आदेश की अवहेलना पर ‘सेवा में व्यवधान’ (Break in Service) जैसी कठोर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी। लेकिन इस आदेश के महज 13 दिन बाद ही पोड़ी उपरोड़ा बीईओ ने 3 शिक्षकों का मनमुताबिक संलग्नीकरण कर दिया। मामला सुर्खियों में आते ही कलेक्टर कोरबा ने बीईओ को तलब कर जमकर फटकार लगाई थी, जिसके बाद आनन- फानन में वह आदेश निरस्त करना पड़ा था। सूत्रों के अनुसार फटकार का असर कुछ दिन ही रहा और बीईओ ने फिर से वही खेल शुरू कर दिया है। जिसके बाद उन्होंने कार्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी पोड़ी उपरोड़ा के आदेश क्र./ स्था./ 2026-27/ 1113, दिनांक 31 अगस्त 2026 के तहत प्राथमिक शाला दुल्लापुर, संकुल दुल्लापुर के प्रधान पाठक चंद्रपाल सिंह मरावी को प्राथमिक शाला मुड़मिसनी, संकुल अमलीकुंडा में संलग्न कर दिया है। जारी आदेश में हवाला दिया गया है कि दिनांक 10 अगस्त 2026 की स्थायी शिक्षा समिति की बैठक और शाला प्रबंधन समिति मुड़मिसनी तथा उपसरपंच ग्राम पंचायत मेरई के प्रतिवेदन दिनांक 25 अगस्त 2026 के आधार पर, दर्ज संख्या 40 एवं एकल शिक्षकीय होने के कारण यह पदस्थापना की गई है। ऐसे में गंभीर सवाल उठ रहे हैं कि जब संबंधित शिक्षक नियमित शासकीय सेवक है, न कि पंचायत या संविदा कर्मी, तो किस नियम के तहत शाला प्रबंधन समिति और उपसरपंच के प्रस्ताव पर उसका संलग्नीकरण किया गया? और यदि आपातकालीन परिस्थिति में ही शिक्षक की आवश्यकता थी, तो नियमानुसार उसी संकुल के भीतर से व्यवस्था की जानी थी, न कि 55- 60 किलोमीटर दूर दुल्लापुर से मुड़मिसनी भेजा जाना था। इस तरह के संलग्नीकरण से पहले उच्चाधिकारियों जिला शिक्षा अधिकारी से दिशा- निर्देश लेना अनिवार्य है, जो इस मामले में नहीं लिया गया। अब उक्त आदेश न केवल बीईओ दयाल द्वारा अपने पद का खुला दुरुपयोग है, बल्कि लोक शिक्षण संचालनालय और कलेक्टर के निर्देशों की खुलेआम अवहेलना है। स्थानीय शिक्षकों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि कार्रवाई के अभाव में बीईओ के हौसले आसमान की बुलंदियों को छूने लगी है और वे पोड़ी उपरोड़ा खंड शिक्षा कार्यालय को अपनी निजी दुकानदारी समझ संचालित कर रहे हैं। इससे जहां एक ओर दुल्लापुर जैसे स्कूल में शिक्षकीय व्यवस्था प्रभावित हुई, वहीं शिक्षा की गुणवत्ता पर भी असर पड़ना लाजिमी है। अब देखना होगा कि शासन के आदेश को बलाए- ताक पर रख कर की गई इस मनमानी पर जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के आला अधिकारी किस तरह से लगाम कसने की कार्रवाई करते हैं?










