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रामकुमार श्रीवास पर अवैध वसूली के आरोप! बंद खनिज जांच नाका बना ‘उगाही का अड्डा’, अहिरन नदी का सीना चीर रोज़ निकल रहे सैकड़ों ट्रैक्टर रेत

कटघोरा–अंबिकापुर रोड पर हनुमानगढ़ी के पास स्थित खनिज नाका फिर चर्चा में, अवैध रेत खनन और कथित वसूली को लेकर उठे गंभीर सवाल

कोरबा/कटघोरा। कोरबा जिले के कटघोरा क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन को लेकर बड़ा विवाद सामने आ रहा है। आरोप है कि कटघोरा की अहिरन नदी का सीना चीरकर बड़े पैमाने पर रेत निकाली जा रही है और ट्रैक्टर व हाइवा वाहनों के जरिए धड़ल्ले से इसका परिवहन किया जा रहा है। इस पूरे मामले में कटघोरा–अंबिकापुर मुख्य मार्ग पर हनुमानगढ़ी के पास स्थित खनिज विभाग का जांच नाका भी सवालों के घेरे में आ गया है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि दिनदहाड़े अवैध रेत से भरे ट्रैक्टर और हाइवा मुख्य मार्ग से गुजरते हैं। इसी मार्ग पर खनिज विभाग का बंद पड़ा जांच नाका स्थित है, जहां कथित तौर पर वाहनों से वसूली का खेल चल रहा है। ग्रामीणों के अनुसार खनिज विभाग में कार्यरत कर्मचारी रामकुमार श्रीवास द्वारा जांच के नाम पर वाहनों से पैसे वसूले जाने की चर्चा क्षेत्र में तेजी से फैल रही है।

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वर्षों से बंद पड़ा है खनिज जांच कांटा, फिर भी जारी ‘जांच’

सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि खनिज विभाग का यह जांच कांटा कई वर्षों से बंद पड़ा हुआ है। स्थानीय लोगों के अनुसार लंबे समय से यहां न तो किसी प्रकार की तौल व्यवस्था है और न ही कोई औपचारिक जांच प्रक्रिया चल रही है। इसके बावजूद आरोप है कि बंद पड़े नाके पर ही वाहनों को रोककर जांच के नाम पर पैसे लिए जाते हैं।

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कथित वसूली के बदले दी जाती है पर्ची?

सूत्रों के अनुसार कई मामलों में वाहनों से पैसे लेने के बाद कथित तौर पर पर्ची भी दी जाती है। ऐसे में बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि जब खनिज जांच कांटा वर्षों से बंद पड़ा है तो यह पर्चियां किस आधार पर दी जा रही हैं? क्या यह किसी आधिकारिक प्रक्रिया का हिस्सा है या फिर यह सब किसी के संरक्षण में चल रहा है?

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तय दरों पर वसूली की चर्चा

क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि अलग-अलग प्रकार के वाहनों से अलग-अलग दरों पर पैसे लिए जाते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार कथित तौर पर वसूली की दरें इस प्रकार बताई जा रही हैं—

• कोयला परिवहन कर रहे ट्रेलर से लगभग ₹100 प्रति ट्रिप

• ट्रैक्टर संचालकों से करीब ₹5000 प्रति माह

• हाइवा वाहन से लगभग ₹10,000 प्रति माह

• मुरुम परिवहन करने वाले वाहनों से ₹200 प्रति ट्रिप

ग्रामीणों का आरोप है कि जो लोग इस कथित व्यवस्था का हिस्सा नहीं बनते, उनके वाहनों पर कार्रवाई या चालानी प्रक्रिया की जाती है।

अहिरन नदी से रोज़ निकल रहे 200–300 ट्रैक्टर रेत

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अहिरन नदी और आसपास की नदियों से बड़े पैमाने पर अवैध रेत उत्खनन किया जा रहा है। रात के अंधेरे में जेसीबी मशीनों की मदद से नदी से रेत निकाली जाती है और फिर ट्रैक्टरों तथा हाइवा वाहनों में भरकर विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंचाया जाता है।

ग्रामीणों के मुताबिक प्रतिदिन करीब 200 से 300 ट्रैक्टर रेत नदी से निकाली जा रही है। यदि यह आंकड़ा सही है तो यह अवैध खनन के एक बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करता है।

सरकार को लाखों के राजस्व की हानि

इतनी बड़ी मात्रा में हो रहे अवैध उत्खनन से सरकार को हर दिन लाखों रुपये के राजस्व की हानि होने की आशंका जताई जा रही है। खनिज संसाधनों की इस तरह खुली लूट से सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंच रहा है।

पर्यावरण पर भी पड़ रहा गंभीर असर

विशेषज्ञों का कहना है कि नदियों से अनियंत्रित तरीके से रेत निकालने से नदी की धारा, तट और पर्यावरण संतुलन पर गंभीर असर पड़ता है। लगातार हो रहे अवैध उत्खनन से नदी का प्राकृतिक स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है।

प्रशासन से उच्चस्तरीय जांच की मांग

क्षेत्र के ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि अहिरन नदी में चल रहे अवैध उत्खनन, रेत परिवहन और कथित वसूली के पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि प्राकृतिक संसाधनों की हो रही लूट पर रोक लग सके।

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