लल्लनगुरु बिग ब्रेकिंग-सरकारी जमीन पर ‘जादूगरी’ और रसूखदार के लिए ‘कुर्बान’ होता ईमान!

क्या एक राजस्व निरीक्षक ने किसी ‘खास’ साहब की तिजोरी भरने और उन्हें फायदा पहुंचाने के लिए अपनी *पूरी नौकरी ही दांव पर लगा दी?
पेंड्रा-पेंड्रा रोड से आ रही यह खबर प्रशासनिक ईमानदारी के मुंह पर करारा तमाचा है!
पेंड्रा के सरकारी दफ्तरों में इन दिनों एक नया ‘जादू‘ देखने को मिल रहा है। इस अनोखे जादू के तहत, सालों पुरानी मुख्य डामर सड़क से लगी सरकारी जमीन अचानक नक्शे से गायब हो जाती है और उसकी जगह किसी रसूखदार की निजी जमीन ‘हंसती-मुस्कुराती’ हुई सड़क के ठीक सामने आकर खड़ी हो जाती है।
धन्य हैं राजस्व विभाग के ऐसे ‘कर्मवीर’! खुद की नौकरी और इज्जत दांव पर लग जाए तो मंजूर, लेकिन ‘साहब’ को सीधे मुख्य मार्ग का वीआईपी एक्सेस मिलना ही चाहिए! आखिर ‘रसूखदारों की सेवा’ इसी को तो कहते हैं।

इन सुलगते सवालों का जवाब कौन देगा?
* जादूई नक्शा किसने बनाया? पहले के राजस्व नक्शों में सीना ताने खड़ी शासकीय भूमि अचानक नए नक्शों में ‘अदृश्य’ कैसे हो गई? क्या राजस्व विभाग के पास कोई ऐसी ‘पेंसिल’ आ गई है जो सरकारी ज़मीन को जब चाहे रबर से मिटा देती है?
* रसूखदार की ‘रोड-साइड’ सेटिंग: क्या यह महज एक इत्तेफाक है या फिर किसी बड़े चेहरे को फायदा पहुंचाने के लिए जानबूझकर सरकारी जमीन की बलि चढ़ा दी गई?
* कौन है इस खेल का असली ‘मास्टरमाइंड’? इस पूरे खेल में केवल कलम घिसने वाला छोटा कर्मचारी ही बलि का बकरा बनेगा या पर्दे के पीछे बैठकर रिमोट कंट्रोल चलाने वाले उस ‘रसूखदार’ पर भी कानून का शिकंजा कसेगा?
बने रहिए लल्लनगुरु न्यूज़ के साथ … बहुत जल्द दस्तावेज़ों, खसरा नंबरों और असली-नकली नक्शों के पूरे पुलिंदे के साथ इस महा-घोटाले की परत-दर-परत जनता के सामने होगी।










