RES कोरबा में घूसखोरी पर बवाल: एडीएम प्रभावती पटेल पर जमकर कमीशनखोरी का आरोप, शिकायत CM हेल्पलाइन तक पहुंची, अब मंत्रियों-विधायकों की चौखट पर जाएंगे ठेकेदार

कोरबा। ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) संभाग कोरबा में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी का जिन्न एक बार फिर बाहर आ गया है। कार्यालय कार्यपालन अभियंता कोरबा में पदस्थ एडीएम (ADM) प्रभावती पटेल पर निर्माण कार्यों का बिल पास कराने के बदले जमकर कमीशनखोरी करने और मोटी रकम वसूलने के गंभीर आरोप लगे हैं। ग्राम में हाई स्कूल भवन का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भी महीनों से बिल अटकाए जाने से परेशान ठेकेदारों का गुस्सा अब फूट पड़ा है। मामले की शिकायत सीधे मुख्यमंत्री (CM) हेल्पलाइन 1076 से लेकर जिले के कलेक्टर तक कर दी गई है। इस पूरे विवाद में अब ठेकेदार संघ समेत क्षेत्र के तमाम ठेकेदारों ने एकजुट होकर आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। ठेकेदारों का कहना है कि वे इस भ्रष्टाचार के खिलाफ जल्द ही क्षेत्र के कैबिनेट मंत्री और स्थानीय विधायकों से मिलकर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की मांग करेंगे।
पार्टनर का आरोप: ’50 हजार दो, तभी आगे बढ़ेगी फाइल’

पीड़ित ठेकेदारों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में हाई स्कूल भवन निर्माण का कार्य पूरी गुणवत्ता और समय सीमा के भीतर संपन्न किया है। कार्य पूर्ण होने के बावजूद पिछले 4 महीनों से कार्यालय में अंतिम देयक (Final Bill) को दबाकर रखा गया है। ठेकेदारों का आरोप है कि एडीएम प्रभावती पटेल की शह पर सीधे तौर पर 50,000 रुपये की अवैध मांग की जा रही है। साफ कहा गया है कि जब तक ‘बात’ नहीं होगी और ‘लेन-देन’ फाइनल नहीं होगा, तब तक फाइल एक इंच आगे नहीं बढ़ेगी। छोटे-मोटे निर्माण कार्यों में अगर 2% से 5% तक केवल यही विंग डकार जाएगी, तो ठेकेदार बचाएंगे क्या और काम की गुणवत्ता कैसे कायम रहेगी?
सड़कों से लेकर सियासत तक लड़ाई की तैयारी

इस मामले में नया मोड़ तब आया जब ठेकेदारों ने सामूहिक रूप से इस सिंडिकेट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। ठेकेदारों के संघ ने चेतावनी दी है कि वे केवल प्रशासनिक शिकायत पर भरोसा करके नहीं बैठेंगे। मामले की लिखित शिकायत कलेक्टर कोरबा, SE बिलासपुर और CE रायपुर को भेजी जा चुकी है। ठेकेदारों ने स्पष्ट किया है कि कोरबा जिले में कमीशनखोरी इस कदर हावी हो चुका है कि बिना पैसे दिए जायज भुगतान भी रोक दिया जाता है। इस मनमानी को रोकने के लिए वे जल्द ही माननीय मंत्री और क्षेत्रीय विधायकों से मुलाकात कर भ्रष्ट अधिकारियों-कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करने की मांग करेंगे।
विभागीय पक्ष: ’15 दिन में जांच, दोष सिद्ध हुआ तो होगी FIR’

इस पूरे सनसनीखेज मामले पर जब कार्यपालन अभियंता (E.E.), RES कोरबा से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि फिलहाल 50 हजार रुपये या कमीशन मांगे जाने का कोई लिखित या डिजिटल प्रमाण कार्यालय को नहीं मिला है। फिर भी, जो शिकायतें प्राप्त हुई हैं, उन्हें गंभीरता से लेते हुए एक विशेष जांच समिति का गठन किया जा रहा है। समिति 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। अगर शिकायतकर्ता के पास कोई ऑडियो रिकॉर्डिंग, व्हाट्सएप चैट या गवाह है, तो वे जांच समिति को सौंपें। दोष सिद्ध होने पर संबंधित के खिलाफ निलंबन और FIR दोनों सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि वर्तमान में सभी भुगतान PFMS पोर्टल के माध्यम से सीधे बैंक खातों में होते हैं, इसलिए तकनीकी रूप से किसी भी प्रकार की हेराफेरी संभव नहीं है, लेकिन फाइलों को जानबूझकर रोकना भी गंभीर लापरवाही है।
क्या कहता है कानून?
CG RES मैनुअल और लोक सेवा गारंटी अधिनियम के मुताबिक, कार्य पूर्ण होने के अधिकतम 30 दिनों के भीतर बिल पास हो जाना चाहिए। तय समय सीमा से अधिक देरी होने पर संबंधित पटल प्रभारी और जिम्मेदार अधिकारी पर प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना लगाने का प्रावधान है। वहीं दूसरी ओर, यदि कोई शासकीय सेवक रिश्वत की मांग करता है या प्रताड़ित करता है, तो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोष सिद्ध होने पर 3 से 7 वर्ष तक की जेल का प्रावधान है। पीड़ित ठेकेदारों ने अब इस पूरे मामले को लेकर लोकायुक्त की शरण में जाने का मन भी पूरी तरह बना लिया है।
नोट: यह खबर ठेकेदारों द्वारा लगाए गए आरोपों और विभागीय अधिकारियों के आधिकारिक बयानों पर आधारित है। ‘दैनिक लल्लनगुरू’ न्यूज़ किसी भी व्यक्ति के दोषी होने की पुष्टि नहीं करता है। निष्पक्ष जांच के बाद ही सच सामने आएगा। यदि संबंधित अधिकारी या कर्मचारी अपना पक्ष रखना चाहते हैं, तो उनका बयान भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।









