SDM का इंतजार करता रहा पूरा गांव, घंटों प्रदर्शन के बाद तहसीलदार के लिखित आश्वासन पर टला आंदोलन — भू-विस्थापितों ने दी महाआंदोलन की चेतावनी
समाधान नहीं मिला, तो यह संघर्ष निर्णायक और आर-पार की लड़ाई में बदल जाएगा!?

कोरबा (कुसमुंडा)। अपनी जमीन, रोजगार और पुनर्वास जैसी बुनियादी मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे SECL कुसमुंडा क्षेत्र के भू-विस्थापितों का आक्रोश बुधवार को उस समय खुलकर सामने आ गया, जब विशाल रैली और घंटों चले धरना-प्रदर्शन के बावजूद अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) यानी SDM मौके पर नहीं पहुंचे। ग्रामीणों ने इसे प्रशासनिक उदासीनता बताते हुए गंभीर नाराजगी जताई और आरोप लगाया कि SDM ने स्वयं उपस्थित होने के बजाय तहसीलदार को भेजकर जिम्मेदारी से दूरी बना ली।
धरना स्थल पर SDM के न पहुंचने से माहौल लगातार गरमाता रहा। बड़ी संख्या में जुटे भू-विस्थापितों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी नाराजगी दर्ज कराई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वर्षों से आश्वासन ही मिल रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर समाधान अब तक नहीं हुआ। हालात को देखते हुए प्रशासन की ओर से तहसीलदार मौके पर पहुंचे और आंदोलनकारियों से विस्तार से बातचीत की। भू-विस्थापितों ने अपने सभी प्रमुख मुद्दे—मुआवजा, पुनर्वास, रोजगार और लंबित प्रकरणों—को लेकर खुलकर अपनी बात रखी। लंबी चर्चा और दबाव के बाद प्रशासन की ओर से लिखित आश्वासन जारी किया गया।

लिखित आश्वासन के अनुसार अब 29 मई 2026 को ग्राम चंद्रनगर में एक उच्च-स्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें एडिशनल कलेक्टर, SDM कटघोरा, SECL कुसमुंडा प्रबंधन और प्रभावित ग्रामीण एक साथ बैठकर समस्याओं के स्थायी समाधान पर चर्चा करेंगे। इस आश्वासन के बाद फिलहाल आंदोलन को स्थगित करने का निर्णय लिया गया। हालांकि भू-विस्थापितों ने साफ कर दिया है कि यह केवल अस्थायी विराम है। नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि 29 मई की बैठक में ठोस और अंतिम समाधान नहीं निकलता, तो आंदोलन और अधिक उग्र रूप लेगा।
ग्रामीणों ने जून 2026 में कलेक्टर कार्यालय कोरबा के बड़े घेराव की चेतावनी दी है। इसके साथ ही गेवरा, दीपका, कुसमुंडा, बुड़बुड़, सराईपाली और मानिकपुर सहित प्रभावित क्षेत्रों के हजारों भू-विस्थापितों के एकजुट होकर आंदोलन करने की बात कही गई है। भू-विस्थापितों का कहना है कि वर्षों से उनकी जमीनें कोयला परियोजनाओं के लिए ली जाती रही हैं, लेकिन बदले में रोजगार, पुनर्वास और उचित मुआवजे के वादे आज भी अधूरे हैं। अब उनका साफ कहना है कि अगर इस बार भी समाधान नहीं मिला, तो यह संघर्ष निर्णायक और आर-पार की लड़ाई में बदल जाएगा।










