Marwahi जांच में फर्जीवाड़े की पुष्टि, फिर भी राकेश राठौर पर मेहरबान क्यों है वन विभाग?

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। मरवाही वनमंडल में पौधा तैयार करने के नाम पर हुए कथित करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े में जांच समिति की रिपोर्ट ने गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि की है। रिपोर्ट के अनुसार 1 लाख 6 हजार 606 पौधे तैयार नहीं पाए गए, जबकि इनके नाम पर खर्च और भुगतान दर्ज किया गया। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर अब तक अपेक्षित कठोर कार्रवाई नहीं होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
जांच प्रतिवेदन में केंद्रीय नर्सरी साधवानी के तत्कालीन रोपणी प्रभारी राकेश राठौर की भूमिका को लेकर गंभीर टिप्पणियां सामने आई हैं। रिपोर्ट में शासकीय राशि के दुरुपयोग और रिकॉर्ड में गंभीर गड़बड़ियों का उल्लेख किया गया है। इसके बाद भी विभागीय स्तर पर उनकी स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

सबसे हैरानी की बात यह है कि जिन पर पहले भी ग्रीन क्रेडिट योजना में अनियमितताओं के आरोप लगे और जिनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई तक हो चुकी थी, उन्हें पुनः महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां कैसे सौंपी गईं? यह सवाल अब वन विभाग के अधिकारियों के सामने खड़ा है।
वन महकमे के गलियारों में चर्चा है कि आखिर ऐसी कौन सी वजह है कि बार-बार विवादों में आने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई की रफ्तार धीमी पड़ जाती है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद भी यदि दोषियों पर कठोर कदम नहीं उठाए जाते हैं तो इससे भ्रष्टाचार के खिलाफ विभाग की मंशा पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि करोड़ों रुपये के सरकारी धन से जुड़े मामले में भी जिम्मेदार लोगों को संरक्षण मिलता रहा, तो यह ईमानदार कर्मचारियों और जनता दोनों के साथ अन्याय होगा। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वन विभाग और शासन जांच रिपोर्ट के आधार पर क्या कार्रवाई करते हैं।
सवाल बरकरार है—जब जांच में गड़बड़ियां सामने आ चुकी हैं, तो फिर राकेश राठौर पर इतनी मेहरबानी क्यों? और आखिर किसके संरक्षण में बार-बार विवादों के बावजूद जिम्मेदारियां मिलती रहीं?










