KORBA : एसईसीएल कुसमुंडा की कॉलोनियों में जल संकट से हाहाकार, तीन दिन से सूखे नल… प्रबंधन की बदइंतजामी पर भड़का कर्मचारियों का गुस्सा
महामंत्री रंजय सिंह ने कहा है कि पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध कराना प्रबंधन की जिम्मेदारी

कोरबा। भीषण गर्मी के बीच एसईसीएल कुसमुंडा क्षेत्र की आवासीय कॉलोनियों में गहराए पेयजल संकट ने प्रबंधन की तैयारियों और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आदर्श नगर, नेहरू नगर और विकास नगर सहित कई कॉलोनियों में पिछले तीन दिनों से नियमित जलापूर्ति बाधित है, जिससे हजारों कर्मचारी और उनके परिवार पानी जैसी मूलभूत जरूरत के लिए परेशान हैं। हालात ऐसे हैं कि लोगों को पीने के पानी से लेकर दैनिक उपयोग तक के लिए जूझना पड़ रहा है, जबकि एसईसीएल प्रबंधन समस्या के स्थायी समाधान में अब तक विफल नजर आ रहा है।
जानकारी के मुताबिक कॉलोनियों में जलापूर्ति के लिए वर्षों पुरानी पाइपलाइन का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो अब पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। जगह-जगह लीकेज और पाइप फूटने की घटनाओं के कारण सप्लाई व्यवस्था लगातार प्रभावित हो रही है। हैरानी की बात यह है कि नई पाइपलाइन बिछाने का कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन तकनीकी खामियों के कारण उससे अभी तक जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब गर्मी के मौसम और संभावित जल संकट की जानकारी पहले से थी, तो नई व्यवस्था को समय रहते चालू क्यों नहीं किया गया।

जल संकट से निपटने के लिए टैंकरों के माध्यम से पानी पहुंचाने की व्यवस्था की गई है, लेकिन यह व्यवस्था भी प्रभावित परिवारों की जरूरतों के सामने नाकाफी साबित हो रही है। कई स्थानों पर लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, वहीं पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिलने से नाराजगी लगातार बढ़ रही है।
बताया जा रहा है कि कॉलोनियों को पानी की आपूर्ति अहिरन नदी से की जाती है। भीषण गर्मी के कारण नदी का जलस्तर काफी नीचे चला गया है, जिससे जलापूर्ति पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए दांयीं तट नहर से पानी लेने की वैकल्पिक योजना तैयार की गई थी और नई पाइपलाइन भी बिछाई गई थी, लेकिन तकनीकी खामियों के कारण यह योजना कागजों से आगे नहीं बढ़ सकी। नतीजा यह हुआ कि गर्मी के चरम दौर में कर्मचारी परिवारों को पानी के संकट का सामना करना पड़ रहा है।

इस पूरे मामले को लेकर कर्मचारियों के बीच भारी नाराजगी देखी जा रही है। अखिल भारतीय कोयला खदान मजदूर संघ (भारतीय मजदूर संघ) कोरबा-कुसमुंडा इकाई के महामंत्री रंजय सिंह ने कहा है कि पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध कराना प्रबंधन की जिम्मेदारी है, लेकिन इसके बावजूद कर्मचारी और उनके परिवार लगातार परेशान हो रहे हैं। उन्होंने नई पाइपलाइन की तकनीकी खामियों को तत्काल दूर कर नियमित जलापूर्ति बहाल करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो कर्मचारी हित में आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा।
भीषण गर्मी के बीच पैदा हुआ यह जल संकट अब केवल पेयजल की समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह एसईसीएल प्रबंधन की तैयारी, निगरानी और जवाबदेही पर भी बड़ा सवाल बनकर खड़ा हो गया है। कॉलोनीवासियों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि आखिर कब तक उनके घरों के सूखे नलों में पानी लौटेगा और उन्हें राहत मिलेगी।










