गौरेला- पेंड्रा – मरवाही – पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल को अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन जीपीएम का समर्थन, चार प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलन तेज
फेडरेशन के संयोजक डॉ. एस. मरावी कार्यकारिणी के साथ हड़ताल स्थल पर पहुंचे, पदोन्नति, वेतन विसंगति, पीवी ऐप बंद करने और द्वेषपूर्ण कार्रवाई निरस्त करने की मांग को लेकर पटवारी लामबंद

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। छत्तीसगढ़ में पटवारी संघ की अनिश्चितकालीन हड़ताल लगातार जारी है। पटवारियों की लंबित मांगों और आंदोलन के समर्थन में अब विभिन्न कर्मचारी संगठन भी सामने आने लगे हैं। इसी कड़ी में आज छत्तीसगढ़ अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही ने पटवारी संघ की हड़ताल को अपना पूर्ण समर्थन दिया।
फेडरेशन के जिला संयोजक डॉ. एस. मरावी अपनी समस्त कार्यकारिणी के साथ हड़ताल स्थल पर पहुंचे और पटवारी संघ की मांगों को जायज बताते हुए आंदोलन के प्रति एकजुटता जाहिर की। इस दौरान विभिन्न कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी एवं प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। समर्थन मिलने से पटवारी संघ के आंदोलन को कर्मचारी संगठनों की व्यापक एकजुटता मिलती दिखाई दे रही है।

पटवारी संघ के जिला अध्यक्ष धीरज पांडे एवं जनार्दन मंडल ने बताया कि पटवारी लंबे समय से अपनी जायज मांगों को लेकर शासन-प्रशासन के समक्ष आवाज उठाते आ रहे हैं, लेकिन बार-बार ज्ञापन, वार्ता और आश्वासन के बावजूद समस्याओं का निराकरण नहीं हुआ। इसी उपेक्षा के चलते प्रदेशभर के पटवारियों को अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा है।
पदोन्नति के बिना ही सेवानिवृत्त हो रहे पटवारी, 8-10 वर्षों से लंबित है मांग

पटवारी संघ की प्रमुख मांगों में पटवारी संवर्ग से राजस्व निरीक्षक पद पर विभागीय पदोन्नति शामिल है। संघ का कहना है कि पटवारी पद पर नियुक्त होने वाले अधिकांश कर्मचारी बिना किसी पदोन्नति के उसी पद से सेवानिवृत्त हो जाते हैं। पिछले 8 से 10 वर्षों से संगठन इस मांग को लेकर लगातार शासन के समक्ष ज्ञापन और वार्ता के माध्यम से अपनी बात रखता आ रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।
संघ के अनुसार, लगभग दो वर्ष पूर्व इस विषय सहित अन्य मांगों को लेकर हुए आंदोलन के बाद तत्कालीन प्रमुख सचिव सुबोध सिंह के नेतृत्व में पांच वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों और पटवारी संघ के प्रतिनिधिमंडल के बीच सकारात्मक चर्चा हुई थी। उस दौरान दोनों प्रमुख मांगों का दो महीने के भीतर निराकरण कराने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन दो वर्ष बीतने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। संघ ने सवाल उठाया है कि आखिर उच्चस्तरीय बैठक में दिए गए निर्देशों का पालन अब तक क्यों नहीं हुआ?

2017 से वेतन विसंगति का दंश झेल रहे पटवारी
पटवारी संघ की दूसरी प्रमुख मांग वेतन विसंगति दूर करने की है। संघ के मुताबिक वर्ष 2017 में पटवारियों का ग्रेड-पे 2200 रुपये से बढ़ाकर 2400 रुपये किया गया था, लेकिन तहसील एवं जिला स्तर पर वेतन निर्धारण में हुई विसंगतियों के कारण आज भी बड़ी संख्या में पटवारियों के वेतन में अंतर बना हुआ है। इससे संबंधित कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। कोष एवं लेखा विभाग में भी वेतन निर्धारण की त्रुटियों के कारण सत्यापन में परेशानी आ रही है।
संघ का कहना है कि वर्ष 2017 से लगातार इस समस्या के समाधान की मांग की जा रही है, लेकिन आज तक कोई प्रभावी पहल नहीं हुई।
करीब 100 करोड़ खर्च के बाद भी सवालों में पीवी ऐप, बंद करने की मांग
पटवारी संघ ने पीवी ऐप की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। संघ का आरोप है कि लगातार संशोधनों के बावजूद ऐप में व्याप्त तकनीकी खामियां दूर नहीं हो पाई हैं। इसके माध्यम से तैयार किए जा रहे नक्शों में अशुद्धियां सामने आ रही हैं, जिससे किसानों के साथ-साथ राजस्व विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
संघ ने दावा किया है कि इस ऐप पर लगभग 100 करोड़ रुपये खर्च किए जाने के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं मिले हैं। ऐसे में जनहित और किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पीवी ऐप को तत्काल बंद करने, किसानों की समस्याओं के निराकरण के लिए उचित वैकल्पिक व्यवस्था लागू करने तथा इस परियोजना से जुड़े जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच कर दोषियों पर वैधानिक कार्रवाई करने की मांग की गई है।
पटवारियों पर कार्रवाई को बताया द्वेषपूर्ण, निरस्त करने की मांग
संघ ने पीवी ऐप में तकनीकी खामियों के बावजूद पटवारियों पर की गई विभागीय कार्रवाई का भी विरोध किया है। संगठन के अनुसार, ऐप की विसंगतियों के कारण काम करने में व्यावहारिक कठिनाइयां आ रही थीं। इसके बावजूद कई जिलों में पटवारियों को नोटिस जारी किए गए, स्थानांतरण किए गए और निलंबन जैसी कार्रवाई भी की गई।
संघ का कहना है कि जब तकनीकी व्यवस्था में ही गंभीर खामियां मौजूद हैं, तो उन खामियों के लिए मैदानी कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। संगठन ने ऐसी सभी द्वेषपूर्ण कार्रवाइयों को निरस्त करने की मांग की है।
कई कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी रहे मौजूद
पटवारी संघ की हड़ताल को समर्थन देने पहुंचे कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों में जिला अध्यक्ष डॉ. वी.पी. सिंह, छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष सचिन तिवारी, कैशलेस संघ के प्रदेश संयोजक पीयूष गुप्ता, संभाग सचिव अजय चौधरी, हॉस्टल अधीक्षक संघ के जिला अध्यक्ष प्रीतुराज बिसेन सहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी एवं कर्मचारी शामिल रहे।
पटवारी संघ का कहना है कि उनकी मांगें किसी व्यक्तिगत लाभ से जुड़ी नहीं, बल्कि लंबे समय से लंबित विभागीय पदोन्नति, वेतन संबंधी विसंगतियों और कार्यप्रणाली में सुधार से संबंधित हैं। अब देखना होगा कि कर्मचारी संगठनों के समर्थन और लगातार जारी आंदोलन के बीच शासन इन मांगों पर कब तक ठोस निर्णय लेता है।









