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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बेबसी से मुंह ‘चिढ़ाते’ सुप्रीम लीडर तक… ईरान में ट्रंप की जीत के दावे को झुठलाते 7 कारण

वॉशिंगटन: अमेरिका और इजरायल गठबंधन ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया था। इस हमले के बाद शुरू हुए युद्ध ने दो हफ्ते पूरे कर लिए हैं और दुनिया के बड़े हिस्से पर असर डाला है। अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार जीता का दावा कर रहे हैं लेकिन हकीकत में युद्ध के विस्तार को नियंत्रित करने की उनकी क्षमता घट रही है। खासतौर से तेहरान में सत्ता की मजबूती और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने ने अमेरिकी प्रशासन को मुश्किल में डाल दिया है।

सीएनएन से बात करते हुए अमेरिकी नौसेना के रिटायर्ड कैप्टन लॉरेंस ब्रेनन ने कहा, ‘अगर आप स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का इस्तेमाल ना कर पाएं तो जीत का दावा कैसे कर सकते हैं। ट्रंप का युद्ध के पहले या दूसरे दिन जीत का ऐलान करना सही नहीं है। यह युद्ध हमारी उम्मीद से कहीं लंबा चलने वाला है।’ सीएनएन ने अपनी रिपोर्ट में ऐसे 7 कारण बताए हैं, जिनसे पता चलता है कि ट्रंप का ईरान में जीत का दावा गलत है।

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1.हॉर्मुज जलडमरूमध्य का संकट

ईरान ने अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद कर दिया है। यह दुनिया में तेल सप्लाई का एक मुख्य रास्ता है। अमेरिका के पास ईरान की मर्जी के बिना इस जलडमरूमध्य को खोलने के लिए कोई स्पष्ट सैन्य समाधान मौजूद नहीं है। ट्रंप के इस रास्ते की सुरक्षा पर अभी तक के दावे हवा-हवाई साबित हुए हैं।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना अमेरिका के लिए आसान नहीं है। ईरान बहुत कम सैनिकों और सस्ते ड्रोन की मदद से भी इस रास्ते को बंद रख सकते हैं। एक्सपर्ट का कहना है कि इस रास्ते को खोलने का दरअसल कोई सैन्य समाधान नहीं है। अगर इसे सैन्य ताकत के दम पर खोल भी लेते हैं तो भी कंपनियां ईरान के भरोसे के बिना यहां से नहीं जाएंगी।

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2.सर्वोच्च नेता से परेशान ट्रंप

डोनाल्ड ट्रंप की दो हफ्ते के युद्ध में दूसरी ‘हार’ कामयाबी के साथ ईरान का नया सुप्रीम लीडर चुनना है। अमेरिकी-इजरायली हमले के पहले दिन अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत को सत्ता-परिवर्तन की तरह पेश किया गया। हालांकि गुजरते दिनों के साथ तेहरान की सत्ता ना सिर्फ संभल गई बल्कि नया सुप्रीम लीडर भी चुन लिया गया।

डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रतिनिधि और मरीन कॉर्प्स के पूर्व सैनिक जेक ऑचिनक्लॉस ने CNN से बातचीत में कहा कि ईरान के नए सर्वोच्च नेता अपने पिता के मुकाबले ज्यादा सख्त रुख वाले व्यक्ति हैं। उन्होंने काफी सख्त शब्दों का इस्तेमाल अपने पहले बयान में किया है। उनका यह रुख एक तरह से ट्रंप का मुंह चिढ़ाने जैसा है।

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3.ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम

डोनाल्ड ट्रंप दावा करते हैं कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को तकरीबन नष्ट कर दिया है। यही बात उन्होंने पिछले साल जून के हवाई हमलों के बाद भी कही थी। हालांकि ऐसे बयान भी आ रहे हैं कि ईरान के पुास संवर्धित यूरेनियम का भंडार है और भविष्य में वह अपने परमाणु कार्यक्रम को फिर से शुरू कर सकता है।

संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था का मानना है कि इस्फहान परमाणु संयंत्र में 200 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम मौजूद है। इसे नष्ट किए बिना ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं के बारे में अमेरिका निश्चित नहीं हो सकता। ईरान में जमीनी सेना भेजने जैसे जोखिम भरे मिशन की आवश्यकता होगी। यह ट्रंप के लिए एक मुश्किल फैसला होगा।

4.ईरान की राजनीतिक स्थिरता

डोनाल्ड ट्रंप ने लगातार यह कोशिश की है कि ईरान में विद्रोह भड़के और तेहरान में सत्ता बदले। अब तक ऐसे किसी विद्रोह के कोई सार्वजनिक संकेत नहीं मिले हैं। कई विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और इजरायल की बमबारी ने सरकार विरोधियों के लिए रास्ते खोलने की बजाय संभावनों को कम कर दिया है।

एक्सपर्ट का मानना है कि युद्ध रुकने के बाद तेहरान का शासन एक क्रूर कार्रवाई करेगी। वह उन लोगों को कोई छूट नहीं देगी, जो किसी भी तरह से सरकार के खिलाफ दिखे हैं। ऐसे में ट्रंप की ईरान की ‘आजादी’ (सत्ता परिवर्तन) की ख्वाहिश और भी दूर की कौड़ी हो जाएगी। यह उनके लिए निश्चित ही एक हार होगी।

5.क्या इजरायल लड़ाई रोकेगा?

डोनाल्ड ट्रंप के लिए इजरायल भी एक बड़ी चुनौती है। ट्रंप एक ऐसे मोड़ पर पहुंच जाते हैं, जहां वे राजनीतिक कारणों से युद्ध खत्म करना चाहते हैं तो भी इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि इजरायल इसके लिए मानेगा। पहले से ही ऐसे संकेत मिल चुके हैं कि अमेरिका और इजरायल के रणनीतिक लक्ष्य अलग-अलग हो सकते हैं।

6.युद्ध का कोई स्पष्ट नैरेटिव नहीं

इस लड़ाई में डोनाल्ड ट्रंप की तीसरी बड़ी अहम कमजोरी युद्ध को लेकर स्पष्टता ना होना है। ट्रंप प्रशासन की ओर से अपने युद्ध लक्ष्यों के विवरण में दिखाई देने वाला भ्रम और विरोधाभास एक सुसंगत ‘विजय गाथा’ स्थापित करने में बाधा डालता है। विशेष रूप से मध्य पूर्व की घटनाओं का ट्रंप के नियंत्रण से बाहर होते जाना चीजों को और खराब करता है।

7.अमेरिका की राजनीतिक स्थिति

ट्रंप प्रशासन के अधिकारी लगातार अमेरिकियों को भरोसा दिला रहे हैं कि युद्ध के कारण तेल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी अस्थायी है और जल्दी ही स्थिति ठीक हो जाएगी। ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को डर है कि युद्ध के खिंचने का मध्यावधि चुनावों पर सीधा असर हो सकता है। ऐसे में कहा जा सकता है कि डोनाल्ड ट्रंप को अपनी मर्जी से छेड़े गए इस युद्ध के उस अनिवार्य परिणाम का सामना करना पड़ रहा है, जिससे बचा नहीं जा सकता है।

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