कोरबा/पोड़ी उपरोड़ा। तनेरा में ‘खनिज माफियाओं’ का आतंक ! मानक विहीन क्रेशरों का काला खेल ! अवैध खनन, ओवरलोड गाड़ियां और प्रदूषण से ग्रामीण त्रस्त ? फिर भी प्रशासन मौन ?
क्रेशर माफियाओं के आगे बेबस प्रशासन ? तनेरा में नियमों की खुलेआम हत्या

खनिज माफियाओं का काला साम्राज्य ! शिकायतों के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं?
कोरबा/पोड़ी उपरोड़ा। ग्राम पंचायत तनेरा और आसपास का इलाका इन दिनों कथित खनिज माफियाओं और मानक विहीन क्रेशरों के चलते भारी संकट झेल रहा है। गांवों में उड़ती धूल, दिन-रात गूंजता मशीनों का शोर और ओवरलोड वाहनों की दहशत ने ग्रामीणों का जीना दूभर कर दिया है। आरोप है कि कई क्रेशर संचालक नियम-कायदों को ताक पर रखकर खुलेआम संचालन कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं।ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत और आवेदन देने के बावजूद कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रही। अब लोगों के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि आखिर इन क्रेशर संचालकों पर प्रशासन इतना मेहरबान क्यों है?

बिना तिरपाल दौड़ रहीं मौत की गाड़ियां !
तनेरा क्षेत्र की सड़कों पर गिट्टी और पत्थरों से भरे ओवरलोड भारी वाहन बिना तिरपाल धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं। इन वाहनों से उड़ती धूल ने गांवों को मानो “डस्ट ज़ोन” में बदल दिया है।ग्रामीणों का आरोप है कि परिवहन नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ रही हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग कार्रवाई करने के बजाय तमाशबीन बना हुआ है। ओवरलोड वाहनों से सड़कें टूट रही हैं और हर पल बड़े हादसे का खतरा मंडरा रहा है। सबसे ज्यादा असर बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ रहा है। गांवों और स्कूलों तक पहुंच रही धूल से सांस संबंधी बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है।

बिना सुरक्षा उपकरणों के चल रहे क्रेशर
जानकारी के अनुसार क्षेत्र के कई क्रेशरों में प्रदूषण नियंत्रण के जरूरी उपकरण तक नहीं लगाए गए हैं। न वाटर स्प्रिंकलर, न डस्ट कंट्रोल सिस्टम और न ही सुरक्षा कवर। क्रेशरों से निकल रही धूल खेतों तक पहुंच रही है, जिससे फसलें बर्बाद हो रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उपजाऊ जमीन धीरे-धीरे बंजर होती जा रही है, लेकिन प्रशासन को शायद यह दिखाई नहीं दे रहा।

धूल-शोर से गांव बना “गैस चैंबर”
ग्रामीणों ने बताया कि दिनभर उड़ती धूल और मशीनों के कानफोड़ू शोर से लोगों का घरों में रहना मुश्किल हो गया है। मवेशियों के बीमार होने और लोगों में सांस संबंधी दिक्कतें बढ़ने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। इसके बावजूद कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकताएं निभाई जा रही हैं।
स्कूल के पास चल रहे क्रेशर, बच्चों की जिंदगी खतरे में
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कई क्रेशर आबादी और शासकीय स्कूलों के बेहद करीब संचालित हो रहे हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों को धूल और गहरे गड्ढों के बीच से होकर गुजरना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि मशीनों के तेज शोर से पढ़ाई प्रभावित हो रही है और बच्चों की सुरक्षा भी खतरे में है। लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक मौन साधे हुए हैं।
अवैध खनन पर बड़ा सवाल
तनेरा क्षेत्र में अवैध खनन को लेकर भी गंभीर आरोप लग रहे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि स्वीकृत पट्टे से अधिक क्षेत्र में खनन किया जा रहा है और बालू-पत्थर का अवैध उत्खनन धड़ल्ले से जारी है। लोगों का आरोप है कि स्थानीय अधिकारियों और खनिज माफियाओं की मिलीभगत के चलते कार्रवाई सिर्फ कागजों में दिखाई जाती है।
प्रशासन पर उठे बड़े सवाल
लगातार शिकायतों और पर्यावरणीय खतरे के बावजूद प्रशासन की चुप्पी अब लोगों के गुस्से को और भड़का रही है। ग्रामीणों ने मांग की है कि मानक विहीन क्रेशरों की तत्काल जांच कर सख्त कार्रवाई की जाए।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है —
क्या प्रशासन ग्रामीणों की जिंदगी बचाएगा या फिर खनिज माफियाओं के आगे यूं ही घुटने टेकता रहेगा?









