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पेंड्रा/कोटमी। सुख-दुःख और विपत्तियों में ही होती है सच्चे मित्र की पहचान : व्यास अशोककृष्ण महाराज- हवन-पूर्णाहुति, ब्राह्मण भोज एवं भंडारा प्रसाद के साथ संपन्न हुआ सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा आयोजन

पेंड्रा/कोटमी। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ग्राम सेखवा में आयोजित सप्तदिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का रविवार को हवन-पूर्णाहुति, ब्राह्मण भोज एवं भंडारा प्रसाद वितरण के साथ भव्य समापन हो गया। 15 जून से 22 जून तक चले इस धार्मिक आयोजन में वृंदावन धाम से पधारे सुप्रसिद्ध कथावाचक एवं ज्योतिषाचार्य पंडित अशोककृष्ण व्यास जी महाराज ने श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत कथा का अमृतपान कराया। कथा के दौरान प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर धर्म, भक्ति और अध्यात्म के संदेशों को आत्मसात करते रहे।

इस धार्मिक आयोजन के मुख्य यजमान सेवानिवृत्त पटवारी पंडित पूरनलाल शर्मा एवं उनका परिवार रहा। कथा स्थल पर सेखवा, कोटमी, पेंड्रा सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु, भक्तगण और शिष्यगण उपस्थित हुए। पूरे सात दिनों तक गांव का वातावरण भक्तिमय बना रहा और भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से क्षेत्र गूंजता रहा।

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कथा के दौरान व्यास जी महाराज ने श्रीमद्भागवत महापुराण के विभिन्न प्रसंगों का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, सदाचार, सत्संग, माता-पिता की सेवा, समाज के प्रति दायित्व और सनातन संस्कृति के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में अच्छे संस्कारों को अपनाना चाहिए तथा वेद, पुराण और धर्मग्रंथों में बताए गए आदर्शों का अनुसरण करना चाहिए। यही मार्ग व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति और जीवन की सफलता की ओर ले जाता है।

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कृष्ण-सुदामा प्रसंग ने श्रद्धालुओं को किया भावविभोर

कथा के सप्तम एवं अंतिम दिवस में व्यास जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा के जीवन चरित्र का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि यदि सच्ची मित्रता की मिसाल देखनी हो तो भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा के जीवन से बेहतर उदाहरण कोई नहीं हो सकता। गुरुकुल में साथ शिक्षा प्राप्त करने वाले दोनों मित्रों ने जीवनभर मित्रता का धर्म निभाया।

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उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण द्वारका के राजा बन गए, जबकि सुदामा अत्यंत गरीब ब्राह्मण के रूप में सादगीपूर्ण जीवन व्यतीत करते रहे। आर्थिक स्थिति में भारी अंतर होने के बावजूद दोनों की मित्रता में कभी दूरी नहीं आई। जब सुदामा अपनी पत्नी के आग्रह पर द्वारका पहुंचे तो भगवान श्रीकृष्ण ने राजसी वैभव को त्यागकर अपने मित्र का स्वागत किया और उन्हें गले लगाकर भावुक हो उठे।

व्यास जी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने सुदामा के चरणों को अपने अश्रुओं से धोकर यह संदेश दिया कि सच्ची मित्रता में अहंकार और पद का कोई स्थान नहीं होता। उन्होंने कहा कि सुदामा अपनी गरीबी और कठिनाइयों को संकोचवश अपने मित्र कृष्ण से कह नहीं पाए, लेकिन भगवान ने बिना बताए ही उनके मन की पीड़ा को समझ लिया।

उन्होंने बताया कि सुदामा अपने साथ चावल की एक छोटी सी पोटली लेकर गए थे, जिसमें उनकी पत्नी का प्रेम और श्रद्धा समाहित थी। भगवान श्रीकृष्ण ने उसी प्रेम को स्वीकार किया और दो मुट्ठी चावल ग्रहण करते ही अपने मित्र पर असीम कृपा बरसा दी। बिना कुछ मांगे ही सुदामा को समृद्धि और सुख प्रदान कर दिया।

व्यास जी ने कहा, “एक सच्चा मित्र वही होता है जो बिना कहे अपने मित्र की भावनाओं और कठिनाइयों को समझ ले तथा निस्वार्थ भाव से उसकी सहायता करे। सुख-दुःख और विपत्तियों में ही सच्चे मित्र की पहचान होती है। यदि जीवन में एक सच्चा मित्र मिल जाए तो वह जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति है।”

सनातन धर्म की रक्षा और सदाचार का संदेश

अपने प्रवचन में व्यास जी महाराज ने सनातन धर्म के अनुयायियों से अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि श्रेष्ठ आचरण, मानव सेवा और समाज के कल्याण की भावना भी धर्म का ही स्वरूप है।

उन्होंने कहा कि “सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः” की भावना को अपने जीवन में उतारना चाहिए। सभी के सुख, स्वास्थ्य और कल्याण की कामना करना ही सच्चा मानव धर्म है। व्यक्ति को अपने व्यवहार में विनम्रता, दया, करुणा और सदाचार को स्थान देना चाहिए। यही जीवन की वास्तविक सफलता और सार्थकता है।

आकर्षक झांकियों ने बांधा समां

कथा आयोजन के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की जीवंत झांकी, वामन भगवान, माता रुक्मिणी, सुदामा तथा भगवान के बाल स्वरूपों की सुंदर प्रस्तुतियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहीं। झांकियों ने भक्तों को भक्ति और अध्यात्म के वातावरण में सराबोर कर दिया।

रुक्मिणी मंगल प्रसंग के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण की भव्य बारात भी निकाली गई। यह बारात कोटमी तिराहा स्थित अतुल अग्निहोत्री परिवार के निवास से कथा स्थल तक बैंड-बाजों, आतिशबाजी और जयकारों के साथ धूमधाम से निकाली गई। बारात में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और पूरे मार्ग में धार्मिक उत्साह का वातावरण बना रहा।

जनप्रतिनिधियों और श्रद्धालुओं ने लिया आशीर्वाद

कथा आयोजन के दौरान विभिन्न जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं श्रद्धालु भी व्यासपीठ पर पहुंचे और महाराज श्री का आशीर्वाद प्राप्त किया। इनमें पेंड्रा नगर पालिका अध्यक्ष राकेश जालान, मरवाही विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक डॉ. के.के. ध्रुव, पूर्व जिला अध्यक्ष मनोज गुप्ता, पूर्व सरपंच इतवार सिंह ओट्टी, उपसरपंच रविंद्र कैवर्त, पुलिस चौकी कोटमी प्रभारी पवन राठौर, सीताराम कैवर्त सहित विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालु एवं शिष्यगण प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

पूर्णाहुति के साथ हुआ समापन

सप्तदिवसीय कथा के समापन अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत हवन एवं पूर्णाहुति संपन्न कराई गई। इसके बाद आचार्यों का सम्मान, पूजन और दक्षिणा अर्पण किया गया। ब्राह्मण भोज के उपरांत श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।

आयोजन समिति ने बताया कि इस धार्मिक अनुष्ठान की सफलता में चंद्रकांत शर्मा, अरुण शर्मा, निशांत तिवारी, सूर्यकांत चतुर्वेदी सहित परिवारजनों, रिश्तेदारों एवं ग्रामवासियों का विशेष योगदान रहा। स्थानीय लोगों के सहयोग से यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ और क्षेत्र में धर्म एवं संस्कृति के प्रति नई जागरूकता का संदेश छोड़ गया।

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