पाम मॉल जमीन घोटाले में हाईकोर्ट की सख्ती: सभी पक्षों को सुनकर ही होगा फैसला, जांच पर फिर उठे सवाल
कोर्ट के आदेश और पुलिस जांच में टकराव,“सभी पक्षों को सुनना जरूरी”

कोरबा: शहर के बहुचर्चित पाम मॉल भूमि विवाद मामले में अब न्यायिक स्तर पर बड़ा मोड़ आ गया है। कथित कूट रचना और शासकीय दस्तावेजों में हेरफेर के आरोपों से जुड़े इस प्रकरण में हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा है कि मामले में सभी पक्षों को सुनकर ही अंतिम निर्णय लिया जाए।
बार-बार खात्मा रिपोर्ट पर सवाल

सूत्रों के अनुसार, कोतवाली पुलिस ने इस प्रकरण में दो बार खात्मा रिपोर्ट निरस्त होने के बाद तीसरी बार फिर से खात्मा रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत की है। आरोप है कि पुलिस जांच में गंभीर तथ्यों की अनदेखी की जा रही है और अधूरी जांच के आधार पर रिपोर्ट दी जा रही है।
कोर्ट के आदेश और पुलिस जांच में टकराव

मामले में पहले ही न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा पुलिस को 30 दिनों के भीतर चार्जशीट (अभियोग पत्र) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद पुलिस द्वारा पुनः खात्मा रिपोर्ट दाखिल किए जाने से न्यायिक आदेशों के अनुपालन पर सवाल खड़े हो गए हैं।
हाईकोर्ट ने तय की समयसीमा

याचिका WPCR 221/2026 में हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोरबा को 4 सप्ताह के भीतर खात्मा प्रतिवेदन पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि निर्णय से पहले सभी पक्षों को पूरी तरह सुना जाए, ताकि कोई महत्वपूर्ण तथ्य छूट न जाए।
“सभी पक्षों को सुनना जरूरी”
हाईकोर्ट ने यह रुख अपनाकर संकेत दिया है कि इस मामले में केवल एकतरफा जांच रिपोर्ट के आधार पर निर्णय नहीं दिया जा सकता। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पारदर्शी प्रक्रिया और सभी पक्षों की सुनवाई आवश्यक है।
आरोप: जांच में पक्षपात?
फरियादी अंकित सिंह का आरोप है कि पुलिस जांच में उन सभी महत्वपूर्ण पक्षों को शामिल नहीं किया जा रहा है, जिन्हें पूर्व में एसडीएम स्तर की जांच में जोड़ा गया था। साथ ही यह भी दावा किया गया है कि उपलब्ध दस्तावेजी साक्ष्यों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
कानूनी बहस भी तेज
विधिक जानकारों के अनुसार, इस मामले में CrPC की धारा 362 का उल्लेख भी सामने आया है, जिसमें कहा गया है कि एक बार निर्णय हो जाने के बाद उसे सामान्यतः बदला नहीं जा सकता, सिवाय लिपिकीय त्रुटियों के सुधार के।
अब सबकी निगाहें कोर्ट के अगले फैसले पर
इस पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या निचली अदालत पुलिस की खात्मा रिपोर्ट स्वीकार करेगी या फिर चार्जशीट दाखिल करने के निर्देशों को प्राथमिकता दी जाएगी।फिलहाल मामला न्यायिक प्रक्रिया के केंद्र में है और सभी पक्षों की दलीलों के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।









