घोटाले पर घोटाला”: गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के सेखवा में राशन व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल, ग्रामीणों में भारी आक्रोश
राशन वितरण प्रक्रिया में भी गंभीर अनियमितताएं

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, 30 मार्च 2026। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ग्राम पंचायत सेखवा में राशन वितरण व्यवस्था पूरी तरह से सवालों के घेरे में आ गई है। अटल महिला स्व सहायता समूह मड़ई द्वारा संचालित सोसाइटी पर ग्रामीणों ने सीधे तौर पर “घोटाले पर घोटाला” करने का आरोप लगाया है। हालात इतने खराब बताए जा रहे हैं कि गरीब और जरूरतमंद हितग्राही लगातार परेशान होकर भटकने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले तीन महीनों से शक्कर का वितरण पूरी तरह बंद पड़ा है, जबकि नमक वितरण भी लंबे समय से नहीं किया जा रहा। शासन की महत्वपूर्ण खाद्य योजनाओं के तहत मिलने वाली इन आवश्यक वस्तुओं से वंचित रहना गरीब परिवारों के लिए गंभीर संकट बन चुका है। इसके बावजूद संबंधित समूह और विभागीय जिम्मेदारों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।

सबसे बड़ी समस्या यह बताई जा रही है कि सेखवा के हितग्राहियों को अपने ही गांव में सुविधा देने के बजाय करीब 5 किलोमीटर दूर मड़ई बुलाया जा रहा है। फिंगर और ओटीपी के नाम पर बुजुर्गों, दिव्यांगों और महिलाओं को बार-बार परेशान किया जा रहा है। कई मामलों में राशन कार्ड तक जमा कर लिए जाते हैं, फिर भी समय पर राशन नहीं दिया जाता, जिससे लोगों में भारी नाराजगी है।
राशन वितरण प्रक्रिया में भी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। आरोप है कि सोसाइटी संचालक खुद काम करने के बजाय हितग्राहियों से ही चावल की बोरियां भरवाते हैं। यह न केवल लापरवाही का उदाहरण है, बल्कि गरीबों के सम्मान के साथ भी खिलवाड़ माना जा रहा है।

स्थिति तब और बदतर हो जाती है जब महीने के अंतिम सप्ताह में राशन बांटा जाता है। अव्यवस्था और समय की कमी के कारण कई लोगों का राशन “लेप्स” हो जाता है। घंटों इंतजार करने के बावजूद खाली हाथ लौटना यहां के लोगों की मजबूरी बन गई है, जिससे शासन की योजनाओं पर भी सवाल उठने लगे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जब से समूह ने सोसाइटी संचालन से हटने का पत्र अधिकारियों को सौंपा है, तब से मनमानी और बढ़ गई है। भर्राशाही और लापरवाही अपने चरम पर है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

पूरे मामले को लेकर अब ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश है और वे इसे बड़े स्तर का घोटाला मान रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो यह मामला और गंभीर रूप ले सकता है।









