4 लाख की डील, फिर खुद के नाम रजिस्ट्री!”जमीन खेल’ का तीसरा खुलासा—पत्नी के नाम जमीन का एग्रीमेंट कर लिया पैसा, बाद में खुद के नाम करा ली रजिस्ट्री?धोखाधड़ी का आरोप
प्याज के छिलके की तरह खुल रहे मामले”—स्थानीयों का दावा

“4 लाख की डील, फिर खुद के नाम रजिस्ट्री!”—कोटमी में ‘जमीन खेल’ पर शंकर प्रजापति घिरे, नया मामला गरमाया? एग्रीमेंट के बाद पलटी बाजी—सूत्रों का दावा: पैसा लिया, जमीन नहीं दी, उल्टे खुद ही बन गए मालिक
कोटमी कला | विशेष रिपोर्ट -कोटमी कला क्षेत्र से जमीन से जुड़ा एक और बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें शंकर प्रजापति पर लेनदेन के बाद कथित धोखाधड़ी करने के आरोप लगे हैं। सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है और मामले को गंभीर बना दिया है।

एग्रीमेंट हुआ, 4 लाख रुपये भी लिए—फिर बदली पूरी कहानी
सूत्रों के अनुसार, संबंधित भूमि पहले शंकर प्रजापति की पत्नी बेबी लता के नाम पर दर्ज थी। इसी भूमि को बेचने के लिए बेबी लता (पति शंकर प्रजापति) की ओर से एक रजक नामक व्यक्ति के साथ विक्रय एग्रीमेंट किया गया। इस एग्रीमेंट के तहत करीब 4 लाख रुपये नगद और चेक के माध्यम से लिए गए, जबकि शेष राशि रजिस्ट्री के समय तय की गई थी। सब कुछ कागजों में तय हो गया, लेकिन आगे जो हुआ उसने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला खड़ा किया।

रजिस्ट्री का उल्टा खेल—क्रेता की जगह खुद बन गए मालिक
सूत्रों का दावा है कि एग्रीमेंट के बाद भी तय शर्तों के अनुसार जमीन की रजिस्ट्री रजक के नाम नहीं की गई। इसके उलट, शंकर प्रजापति ने अपनी पत्नी बेबी लता के नाम दर्ज उसी जमीन को अपने ही नाम पर रजिस्ट्री करवा लिया। यह घटनाक्रम सीधे तौर पर कथित फर्जीवाड़ा और धोखाधड़ी की ओर इशारा करता है।


पीड़ित को न जमीन मिली, न पैसा—न्याय के लिए भटकाव
सूत्रों के मुताबिक, जिसने पैसा दिया वह आज तक न तो जमीन का मालिक बन पाया है और न ही उसकी रकम वापस की गई है। इससे मामला अब केवल विवाद नहीं, बल्कि कथित धोखाधड़ी का रूप ले चुका है।
“प्याज के छिलके की तरह खुल रहे मामले”—स्थानीयों का दावा
स्थानीय लोगों के हवाले से यह कहा जा रहा है कि शंकर प्रजापति से जुड़े मामले लगातार एक के बाद एक सामने आ रहे हैं। हर नया मामला पुराने विवादों की परत खोलता नजर आ रहा है।
तीसरा मामला आया सामने—पहले भी घिरे रहे विवादों में
सूत्रों के अनुसार, यह शंकर प्रजापति से जुड़ा तीसरा जमीन विवाद बताया जा रहा है। पहले डाइवर्सन से जुड़ा मामला सामने आया था? फिर बड़े झाड़/जंगल भूमि से जुड़ा विवाद? और अब यह 4 लाख रुपये लेकर जमीन न देने और खुद के नाम रजिस्ट्री कराने का आरोप। ? इन लगातार मामलों ने पूरे घटनाक्रम को और गंभीर बना दिया है।
सूत्रों के हवाले से बड़ा खुलासा—मामला कोर्ट तक पहुंचा
सूत्रों के अनुसार, यह पूरा प्रकरण अब सिविल और आपराधिक न्यायालय तक पहुंच चुका है और वर्तमान में लंबित बताया जा रहा है। इससे साफ है कि मामला केवल आरोपों तक सीमित नहीं, बल्कि कानूनी जांच के दायरे में भी आ चुका है।
सवाल जो सीधे जवाब मांग रहे हैं
पूरा मामला कई गंभीर सवाल खड़ा करता है— एग्रीमेंट के बाद भी जमीन क्रेता को क्यों नहीं दी गई? पैसा लेने के बाद खुद के नाम रजिस्ट्री कराने का आधार क्या था? और क्या यह पूरा मामला एक सुनियोजित धोखाधड़ी का हिस्सा है?
प्रशासन पर दबाव—जांच और कार्रवाई की मांग तेज
सूत्रों के हवाले से पीड़ित पक्ष और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है। मांग की जा रही है कि शंकर प्रजापति से जुड़े अन्य मामलों की गहराई से जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
अब बड़ा सवाल—कार्रवाई होगी या फिर मामला दबेगा?
कोटमी से उठा यह मामला अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बन चुका है? लगातार सामने आ रहे आरोपों ने प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा—क्या इस बार सख्त कार्रवाई होगी? या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा?









