KATGHORA NEWS | रेंजर अभिषेक कुमार दुबे और एसडीओ संजय त्रिपाठी पर सीधे आरोप: कटघोरा वनमंडल में करोड़ों का खेल, लेमरू हाथी रिज़र्व बना भ्रष्टाचार का अड्डा
कटघोरा वनमंडल में फिर फूटा घोटाले का बम ,

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छत्तीसगढ़ के कटघोरा वन मंडल का केंदई वनपरिक्षेत्र एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। लेमरू हाथी रिज़र्व विकास परियोजना, जो वन्यजीव संरक्षण के लिए बनाई गई थी, अब खुलेआम भ्रष्टाचार और लापरवाही का उदाहरण बनती नजर आ रही है। करोड़ों रुपये की इस योजना में गड़बड़ी के आरोपों ने पूरे विभाग की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

तालाब के नाम पर खेल, नाले को बना दिया “कागजी निर्माण”
जानकारी के अनुसार वर्ष 2025-26 में 11 तालाबों के निर्माण की स्वीकृति दी गई थी। लेकिन जमीनी हकीकत चौंकाने वाली है। पतुरियाडाँड़ क्षेत्र में लगभग ₹16 लाख की लागत से बनाए गए कथित तालाब में कोई ठोस निर्माण नजर नहीं आता। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पहले से बह रहे नाले को ही थोड़ा मोड़कर “तालाब निर्माण” दिखा दिया गया।


एक हफ्ते में लाखों का काम? बड़ा सवाल

ग्रामीणों के अनुसार, यह पूरा काम महज एक सप्ताह में निपटा दिया गया। मजदूरों की जगह जेसीबी और ट्रैक्टर का इस्तेमाल किया गया, जबकि कागजों में मजदूरों के नाम पर भुगतान दर्शाया गया बताया जा रहा है। जंगल से ही पत्थर निकालकर काम चलाया गया, जिससे लागत बेहद कम रही—लेकिन कागजों में लाखों रुपये खर्च दिखाए गए।
तालाब नहीं, सूखा गड्ढा—पानी तक नहीं रोक पाया निर्माण
सबसे बड़ा खुलासा यह है कि यह तथाकथित तालाब पानी तक नहीं रोक पा रहा है और पूरी तरह सूखा पड़ा है। इससे साफ है कि निर्माण कार्य न सिर्फ अधूरा है, बल्कि पूरी तरह लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है।

रेंजर अभिषेक कुमार दुबे और एसडीओ संजय त्रिपाठी पर गंभीर आरोप
इस पूरे मामले में रेंजर अभिषेक कुमार दुबे और एसडीओ संजय त्रिपाठी का नाम सीधे तौर पर आरोपों में सामने आ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दोनों अधिकारियों की मिलीभगत से योजनाओं में भारी गड़बड़ी की गई है और सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है।
संपर्क करने के प्रयास के बावजूद अधिकारियों की ओर से कोई जवाब नहीं मिला, जिससे संदेह और गहरा गया है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

**पहले भी घोटालों से घिर चुका है केंदई वनपरिक्षेत्र**
गौरतलब है कि केंदई वनपरिक्षेत्र और रेंजर अभिषेक कुमार दुबे का नाम पूर्व में भी कई विवादों और कथित घोटालों में सामने आ चुका है। इससे यह मामला और भी गंभीर हो जाता है और यह संकेत देता है कि कहीं न कहीं विभागीय निगरानी में बड़ी कमी है।
वन्यजीव संरक्षण के नाम पर हो रहा खेल?
लेमरू हाथी रिज़र्व परियोजना का उद्देश्य हाथियों को जंगल के भीतर ही पानी और संसाधन उपलब्ध कराना था, लेकिन यदि इस तरह के “कागजी निर्माण” होते रहे, तो यह योजना सिर्फ फाइलों तक ही सीमित रह जाएगी।
जांच नहीं तो उठेंगे बड़े सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी या फिर यह मामला भी दबा दिया जाएगा? करोड़ों रुपये की इस योजना में सामने आए आरोपों ने वन विभाग की कार्यशैली और पारदर्शिता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह न केवल सरकारी धन की बर्बादी का मामला होगा, बल्कि वन्यजीव संरक्षण जैसे गंभीर मुद्दे के साथ भी सीधा खिलवाड़ माना जाएगा।









