कोरबा में ‘वसूली राज’ का आरोप: आबकारी विभाग में एक ही नाम चर्चा में – सुकांत पांडे
कार्रवाई के नाम पर खेल या सेटिंग का सिस्टम? मंत्री के गृह जिले में उठे गंभीर सवाल

कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में इन दिनों आबकारी विभाग की कार्रवाई से ज्यादा “वसूली” की चर्चा तेज हो गई है। हालात यह हैं कि अवैध शराब के खिलाफ अभियान से ज्यादा अब एक ही नाम लोगों की जुबान पर है – सुकांत पांडे। स्थानीय व्यापारियों और आम लोगों के बीच यह खुलकर कहा जा रहा है कि जिले में आबकारी विभाग की कार्रवाई अब सवालों के घेरे में है। आरोप है कि जहां एक ओर दिखावे के लिए छापेमारी की जाती है, वहीं दूसरी ओर “सेटिंग” के जरिए कुछ जगहों को खुली छूट दी जा रही है।
सूत्रों का दावा है कि पूरे जिले में अगर किसी नाम को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा है, तो वह है आबकारी विभाग के उप निरीक्षक सुकांत पांडे। कहा जा रहा है कि अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई की आड़ में एक संगठित वसूली तंत्र सक्रिय है, जिसमें मोटी रकम लेकर कार्रवाई से बचाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह सब उस जिले में हो रहा है, जो प्रदेश के एक मंत्री का गृह क्षेत्र है। ऐसे में यह मामला केवल विभागीय कार्यप्रणाली तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि प्रशासनिक निगरानी और जवाबदेही पर भी सीधे सवाल खड़े कर रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो जाए, तो कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। लेकिन लगातार शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी इस पूरे मामले को और संदिग्ध बना रही है।

अब हालात यह हैं कि कोरबा में आबकारी विभाग की पहचान कार्रवाई से कम और कथित “वसूली तंत्र” से ज्यादा जोड़ी जाने लगी है।
फिलहाल विभाग के अधिकारी कुछ भी बोलने से बच रहे हैं, लेकिन जनता के बीच एक ही सवाल गूंज रहा है —

क्या सच्चाई सामने आएगी या फिर यह मामला भी दबा दिया जाएगा?









