मरवाही वनमंडल में “जंगल राज” का आरोप: भ्रष्टाचार, गबन और लकड़ी तस्करी में संलिप्त कर्मचारियों को संरक्षण देने का आरोप
निलंबित कर्मचारियों की बहाली, शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होने से डीएफओ की कार्यप्रणाली पर सवाल
GPM/मरवाही। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही वनमंडल में इन दिनों विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों और सूत्रों का आरोप है कि वनमंडल में भ्रष्टाचार, गबन, कार्य में लापरवाही और इमारती लकड़ी की तस्करी जैसे मामलों में संलिप्त कर्मचारियों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें संरक्षण दिया जा रहा है।
मामले को लेकर वर्तमान डीएफओ ग्रीष्मी चाँद पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। आरोप है कि अधीनस्थ कर्मचारियों के खिलाफ दर्ज शिकायतों और आदेशों के बावजूद कार्रवाई नहीं की जा रही, जिससे वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

निलंबन के बाद उसी स्थान पर बहाली से उठे सवाल
कुछ माह पहले प्लांटेशन कार्य में लापरवाही के आरोप में परिक्षेत्र सहायक उदय तिवारी और परिसर रक्षक राकेश राठौर को मुख्य वन संरक्षक, बिलासपुर द्वारा निलंबित किया गया था।हालांकि, बाद में मरवाही डीएफओ द्वारा दोनों को बहाल कर पुनः केंद्रीय नर्सरी सधवानी का प्रभार दे दिए जाने से विभागीय हलकों में चर्चा शुरू हो गई। बताया जा रहा है कि निलंबन और उसी स्थान पर बहाली का यह मामला काफी चर्चा में रहा।

लकड़ी तस्करी के आरोपों पर भी जांच पर सवाल
वन परिक्षेत्र मरवाही में नव नियुक्त परिक्षेत्र अधिकारी मुकेश साहू, परिक्षेत्र सहायक, परिसर रक्षक राकेश पंकज तथा वाहन चालक तेज सिंह पर इमारती लकड़ी की तस्करी के आरोप लगाए गए थे। सूत्रों के अनुसार इस मामले की जांच भी विवादों में रही, क्योंकि आरोप है कि जांच के बाद संबंधित कर्मचारियों को क्लीन चिट दे दी गई।

कैम्पा शाखा में फर्जीवाड़े का मामला
वनमंडल की कैम्पा शाखा में लंबे समय से पदस्थ भूपेंद्र साहू पर भी फर्जीवाड़े के आरोप सामने आए थे। उन्हें शाखा से हटाने का आदेश जारी होने के बावजूद आज तक आदेश का पूर्ण पालन नहीं होने की बात कही जा रही है। वहीं अन्य कर्मचारियों के स्थानांतरण या हटाने के आदेशों का पालन हो चुका है।
सैकड़ों शिकायतें, कार्रवाई शून्य
स्थानीय लोगों का कहना है कि वनमंडल से जुड़े मामलों में कई शिकायतें सामने आने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही। इससे आम लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
निष्पक्ष जांच की मांग
जनता और स्थानीय सूत्रों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए, ताकि यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता या लापरवाही सामने आए तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जा सके।










