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मरवाही: 50 लाख तक के कार्यों की एजेंसी ग्राम पंचायत को बनाने और निविदा प्रक्रिया रद्द करने की उठी मांग, CM साय को सौंपा ज्ञापन

‘’बिना पंचायत की अनुशंसा के सीधे टेंडर जारी करना, पंचायत के क्षेत्राधिकार का घोर उल्लंघन है।"योगेंद्र सिंह नहरेल, पूर्व सरपंच व भाजपा नेता

मरवाही।जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) के ग्राम निमधा में आयोजित ‘सुशासन तिहार’ के दौरान प्रदेश के मुखिया विष्णुदेव साय के जन चौपाल कार्यक्रम में पंचायतों के अधिकारों को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। मरवाही के पूर्व सरपंच और भाजपा किसान मोर्चा के निवर्तमान जिलाध्यक्ष योगेंद्र सिंह नहरेल  ने सरपंचों की ओर से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर निर्माण कार्यों में हो रही अनियमितताओं की शिकायत की है।

क्या है पूरा मामला?
जन चौपाल में अपनी बात रखते हुए योगेंद्र सिंह नहरेल ने मांग की कि पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत होने वाले 50 लाख रुपये तक के निर्माण कार्यों की कार्य एजेंसी सीधे तौर पर ग्राम पंचायत को ही बनाया जाए। इसके साथ ही उन्होंने सहायक आयुक्त आदिवासी विकास परियोजना, जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही द्वारा हाल ही में जारी की गई निविदा (टेंडर) प्रक्रिया को तत्काल रद्द करने की मांग की है।

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ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने का आरोप
शिकायत में सीधे तौर पर आरोप लगाया गया है कि सहायक आयुक्त आदिवासी परियोजना द्वारा नियमों को ताक पर रखकर छोटे-छोटे निर्माण कार्यों के लिए टेंडर जारी किए जा रहे हैं। ग्राम पंचायतों को कार्य एजेंसी न बनाकर सीधे तौर पर ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से यह पूरी प्रक्रिया की जा रही है, जो कि पंचायती राज व्यवस्था और स्थानीय स्वशासन के नियमों के विपरीत है।
‘’बिना पंचायत की अनुशंसा के सीधे टेंडर जारी करना, पंचायत के क्षेत्राधिकार का घोर उल्लंघन है।”योगेंद्र सिंह नहरेल, पूर्व सरपंच व भाजपा नेता

पहले भी दरकिनार हो चुका है मुख्यमंत्री का अनुशंसा पत्र
यह कोई पहला मामला नहीं है जब स्थानीय प्रशासन पर सवाल उठे हों। जिले के सरपंचों का आरोप है कि उन्हें डीएमएफ (District Mineral Foundation) और अन्य मदों के निर्माण कार्यों के नाम पर हमेशा ठगा जाता रहा है।
इससे पहले भी डीएमएफ मद के कार्यों के संबंध में खुद मुख्यमंत्री के अनुशंसा पत्र को संबंधित शाखा प्रभारी और लिपिक द्वारा दरकिनार कर दिया गया था, जिसे समाचार पत्रों ने प्रमुखता से उजागर किया था। अन्य विभागों के कार्य भी बिना स्थानीय पंचायत की सहमति या अनुशंसा के सीधे टेंडर के माध्यम से ठेकेदारों को दे दिए जाते हैं, जिससे सरपंचों में भारी आक्रोश है।

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मुख्यमंत्री ने दिया आश्वासन

जन चौपाल में गंभीरता से इस पूरी समस्या को सुनने के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस पर उचित विचार करने और जल्द ही समुचित निर्णय लेने का आश्वासन दिया है। अब देखना यह होगा कि सुशासन का दावा करने वाली सरकार में पंचायतों को उनका हक मिलता है या अफसरशाही इसी तरह हावी रहेगी।

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A Pranav

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