LIVE UPDATE

GPM: कौन है पटवारी आशीष शर्मा? मृत महिला को ‘जिंदा’ दिखाने के खेल में मुख्य किरदार या सिस्टम की बड़ी चूक?

दलालों का नेटवर्क, 15 लाख तक की डील के आरोप—एफिडेविट में शपथकर्ता भी वही, पहचान कर्ता भी वही?

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही | विशेष रिपोर्ट (पार्ट 2)
मृत महिला को कागजों में “जिंदा” दिखाकर जमीन के कथित सौदे के मामले में अब जांच की दिशा और गहराती नजर आ रही है। इस पूरे घटनाक्रम में पटवारी आशीष शर्मा का नाम चर्चा के केंद्र में है। सवाल उठ रहा है—क्या यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही है, या फिर इसके पीछे एक बड़ा और सुनियोजित खेल छिपा है?

नाम क्यों आ रहा चर्चा में?
स्थानीय स्तर पर सामने आ रही जानकारी के मुताबिक, विवादित जमीन का मामला राजस्व रिकॉर्ड और सत्यापन प्रक्रिया से होकर गुजरा। ऐसे में पटवारी की भूमिका अहम हो जाती है। यही वजह है कि आशीष शर्मा का नाम अब इस पूरे प्रकरण में बार-बार सामने आ रहा है। हालांकि, अभी तक किसी आधिकारिक जांच में उनकी भूमिका की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जिस तरीके से दस्तावेज तैयार हुए और प्रक्रिया पूरी हुई, उसने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ये खबर भी पढ़ें…
बड़ा खुलासा: गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में आदिवासी विकास विभाग की खरीदी में ‘महाघोटाला’? जेम पोर्टल की आड़ में ₹40,000 का कंप्यूटर ₹1.14 लाख में खरीदा!
बड़ा खुलासा: गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में आदिवासी विकास विभाग की खरीदी में ‘महाघोटाला’? जेम पोर्टल की आड़ में ₹40,000 का कंप्यूटर ₹1.14 लाख में खरीदा!
July 8, 2026
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM)। छत्तीसगढ़ के आदिवासी बाहुल्य जिले गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) से सरकारी धन के बंदरबांट का एक बेहद चौंकाने वाला मामला...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

क्या बिना सत्यापन के हो गया पूरा खेल?
सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या एक मृत व्यक्ति को “जिंदा” दिखाकर जमीन का सौदा बिना स्थानीय स्तर पर जांच के संभव है? अगर नहीं, तो फिर यह कैसे हुआ? राजस्व प्रक्रिया में पटवारी की जिम्मेदारी होती है कि वह जमीन और मालिक की पुष्टि करे। ऐसे में अगर रिकॉर्ड में मृत महिला को जीवित दर्शाया गया, तो यह चूक कहां हुई—या फिर यह चूक थी भी या नहीं?

दलालों का नेटवर्क? लाखों में तय हुई जमीन
मामले में अब बिचौलियों और दलालों की भूमिका को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि जमीन की एक-एक चौहद्दी की कीमत लाखों रुपये में तय की गई और पूरे सौदे को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया। सूत्रों के मुताबिक, मृत महिला को कागजों में “जिंदा” दिखाने के लिए करीब 15 लाख रुपये तक के लेन-देन की भी चर्चा है। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है, लेकिन इसने पूरे मामले को और अधिक गंभीर बना दिया है।

ये खबर भी पढ़ें…
कटघोरा थाना प्रभारी एम बी पटेल उतरे सडक पर पुलिस का पैदल मार्च, सुरक्षा व्यवस्था का लिया जायजा; यातायात नियम तोड़ने वालों पर हुई कार्रवाई
कटघोरा थाना प्रभारी एम बी पटेल उतरे सडक पर पुलिस का पैदल मार्च, सुरक्षा व्यवस्था का लिया जायजा; यातायात नियम तोड़ने वालों पर हुई कार्रवाई
July 9, 2026
कोरबा/कटघोरा, 9 जुलाई 2026: जिला पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी के निर्देश पर कटघोरा पुलिस ने गुरुवार शाम नगर की सुरक्षा...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

कौन हैं वो दलाल? कौन है वो ‘एक शख्स’?
अब इस पूरे मामले का सबसे बड़ा और रहस्यमय सवाल यही है—आखिर वो लोग कौन हैं, जिन्होंने इस कथित फर्जीवाड़े को अंजाम दिया? सूत्रों के मुताबिक, एक ऐसा शख्स सामने आया है जिसने कथित तौर पर एफिडेविट (शपथ पत्र) में शपथकर्ता (deponent) और पहचानकर्ता (identifier)—दोनों की भूमिका निभाई।

एक ही व्यक्ति—दो भूमिकाएं, संयोग या साजिश?
अगर यह सही है, तो यह सिर्फ प्रक्रिया की चूक नहीं, बल्कि पूरी पहचान प्रणाली को “मैनेज” करने का संकेत देता है। सवाल उठता है—अगर एक ही व्यक्ति ने शपथ भी ली और पहचान भी की, तो असली पहचान की पुष्टि किसने की? क्या यह सब केवल कागजों में पूरा कर लिया गया?

ये खबर भी पढ़ें…
डायल-112 की तत्परता: आधी रात को सर्पदंश पीड़िता को अस्पताल पहुंचाकर बचाई जान
डायल-112 की तत्परता: आधी रात को सर्पदंश पीड़िता को अस्पताल पहुंचाकर बचाई जान
July 10, 2026
डॉयल-112 की त्वरित सहायता से सर्पदंश पीड़िता महिला की बचाई जान रात्रि 00:59बजे सूचना मिलते ही डॉयल-112 टीम ने दिखाई...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

लापरवाही या मिलीभगत?
अब मामला दो संभावनाओं के बीच खड़ा है
क्या यह एक गंभीर प्रशासनिक लापरवाही है? या फिर दलालों और सिस्टम के कुछ हिस्सों की मिलीभगत से रचा गया संगठित खेल? स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी गड़बड़ी बिना किसी स्तर की जानकारी या सहयोग के संभव नहीं हो सकती। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

राजस्व तंत्र पर सीधे सवाल
यह मामला अब सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहा। यह पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है— क्या दस्तावेजों की जांच सिर्फ औपचारिकता बन गई है? क्या पहचान सत्यापन की प्रक्रिया में गंभीर खामियां हैं?

जांच की मांग तेज
स्थानीय स्तर पर इस मामले को लेकर आक्रोश बढ़ रहा है। लोग मांग कर रहे हैं कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो, और पटवारी समेत सभी संभावित जिम्मेदारों व बिचौलियों की भूमिका उजागर की जाए।

सबसे बड़ा सवाल
क्या यह सिर्फ एक अधिकारी की चूक है, या फिर पूरा सिस्टम ही सवालों के घेरे में है? क्या पैसों के दम पर “मृत को जिंदा” दिखाने का खेल चल रहा है? और क्या इस बार सच्चाई सामने आएगी—या यह मामला भी दब जाएगा?

(नोट: खबर में शामिल कुछ दावे स्थानीय सूत्रों और प्रारंभिक जानकारी पर आधारित हैं। आधिकारिक पुष्टि और जांच रिपोर्ट आना अभी बाकी है।)

A Pranav

professional journalist

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *