पोड़ी उपरोड़ा BEO कार्यालय फिर विवादों में: बाबू रिश्वत लेते पकड़ाया, सेवानिवृत्त भृत्य ने स्वत्व भुगतान और PPO रोकने का लगाया आरोप
कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश

कोरबा/पोड़ी उपरोड़ा। जिले के पोड़ी उपरोड़ा स्थित विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय एक बार फिर गंभीर आरोपों और विवादों के चलते सुर्खियों में है। एक ओर कार्यालय में पदस्थ सहायक ग्रेड-2 बाबू प्रदीप मिश्रा को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने 40 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है, वहीं दूसरी ओर एक सेवानिवृत्त भृत्य ने खण्ड शिक्षा अधिकारी पर कथित रूप से मनमाफिक रकम नहीं मिलने पर उसका स्वत्व भुगतान और पेंशन भुगतान आदेश (PPO) रोकने का आरोप लगाया है।
जानकारी के अनुसार, वित्तीय अनियमितताओं को लेकर पूर्व में निलंबित रह चुके सहायक ग्रेड-2 प्रदीप मिश्रा को हाल ही में एक सेवानिवृत्त शिक्षक की जीपीएफ पासबुक में कटौती संबंधी प्रविष्टि करने के एवज में 40 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए ACB ने गिरफ्तार किया था। इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया और कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे।

इसी बीच चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पद से 30 अप्रैल 2026 को सेवानिवृत्त हुए पलटन राम यादव ने कलेक्टर जनदर्शन में आवेदन देकर गंभीर आरोप लगाए हैं। अपने आवेदन में उन्होंने कहा है कि उनके साथ सेवानिवृत्त हुए अन्य कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के दिन ही स्वत्व भुगतान और PPO उपलब्ध करा दिया गया, जबकि उनका भुगतान लंबित रखा गया।
पलटन राम यादव का आरोप है कि वे कथित रूप से मांगी गई रकम देने में सक्षम नहीं थे, जिसके कारण उनके स्वत्व भुगतान और PPO की प्रक्रिया रोकी गई। उन्होंने कलेक्टर से हस्तक्षेप कर लंबित भुगतान और पेंशन लाभ दिलाने की मांग की।

सूत्रों के अनुसार, शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। बताया जा रहा है कि मामले में उच्च स्तर से फटकार मिलने के बाद सेवानिवृत्त भृत्य का स्वत्व भुगतान और PPO जारी कर दिया गया।
लगातार सामने आ रहे मामलों ने पोड़ी उपरोड़ा BEO कार्यालय की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। रिश्वतखोरी की कार्रवाई और सेवानिवृत्त कर्मचारी द्वारा लगाए गए आरोपों ने शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी है।

प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ शून्य सहिष्णुता की नीति की बात करती है, लेकिन पोड़ी उपरोड़ा से सामने आए इन मामलों ने जमीनी स्तर पर व्यवस्था की स्थिति को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन इन मामलों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है।
(नोट: सेवानिवृत्त कर्मचारी द्वारा लगाए गए आरोप उनके आवेदन पर आधारित हैं। संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)









