मरवाही (गौरेला–पेंड्रा–मरवाही) सुशासन के दावों के बीच चंगेरी में गहराया पेयजल संकट, पंचायत सचिव की कार्यशैली पर उठे सवाल
पंचायत सचिव दिलीप पडवार की कथित उदासीनता और लापरवाह कार्यशैली के कारण समस्या लगातार गंभीर

मरवाही (गौरेला–पेंड्रा–मरवाही)। छत्तीसगढ़ सरकार जहां ग्रामीण विकास और सुशासन के दावों के साथ अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं के लाभ पहुंचाने का दावा कर रही है, वहीं जनपद मरवाही अंतर्गत ग्राम पंचायत चंगेरी में पेयजल संकट ने प्रशासनिक व्यवस्था की जमीनी हकीकत को उजागर कर दिया है। भीषण गर्मी के बीच गांव में पानी की भारी किल्लत से ग्रामीणों का जीवन प्रभावित हो गया है।
गांव के कई मोहल्लों में नल-जल योजना पूरी तरह ठप पड़ी है, जबकि अधिकांश हैंडपंपों से भी पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। स्थिति यह है कि महिलाएं रोजाना दूर-दूर तक पानी की तलाश में भटकने को मजबूर हैं, वहीं बुजुर्ग और बच्चे इस गंभीर संकट से सबसे अधिक प्रभावित हैं।

प्रदेश सरकार द्वारा “सुशासन तिहार” जैसे अभियानों के माध्यम से जनसमस्याओं के त्वरित समाधान के दावे किए जा रहे हैं, वहीं चंगेरी की यह स्थिति उन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। जिला प्रशासन स्तर पर पेयजल संकट को लेकर समय-समय पर निर्देश और मॉनिटरिंग की बात सामने आने के बावजूद जमीनी हालात में कोई ठोस सुधार नहीं दिख रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत सचिव दिलीप पडवार की कथित उदासीनता और लापरवाह कार्यशैली के कारण समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। उनका कहना है कि समय पर आवश्यक मरम्मत और व्यवस्था सुधार के प्रयास नहीं किए गए, जिससे स्थिति नियंत्रण से बाहर पहुंच गई। वहीं दूसरी ओर ग्राम पंचायत की सरपंच राधा बाई द्वारा लगातार पहल किए जाने और पंचायत बैठकों में समस्या के समाधान की कोशिशों की बात ग्रामीणों द्वारा बताई जा रही है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर राहत नहीं मिल पाई है।

जानकारी के अनुसार मरवाही जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा भी पेयजल संकट को गंभीर मानते हुए आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि इन निर्देशों के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो सकी। गांव में हालात ऐसे हैं कि कई परिवार निजी साधनों से पानी खरीदने को मजबूर हैं, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। ग्रामीणों में इसे लेकर नाराजगी भी बढ़ती जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब प्रशासन लगातार सक्रियता और मॉनिटरिंग का दावा कर रहा है, तब पंचायत स्तर पर इस तरह की लापरवाही व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। ग्रामीणों ने इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।

चंगेरी का यह मामला केवल एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की वास्तविक स्थिति और प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़ा सवाल बनकर सामने आया है। अब ग्रामीणों की नजर जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है।









